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Expose – नीच जाती का बोल मार पीट कर सरपंच और ग्रामीणों ने कर डाला बहिष्कार, महासमुंद में सरकार का माखौल उड़ाता सच, प्रशासन बेबस

एक तरफ जहां देश नए-नए आयाम गढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ समाज का एक तबका आज भी जात-पात और ऊंच-नीच में लगा हुआ है।ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक से आया है। घटना हैरान कर देने वाली है जहां एक परिवार को सावन सोमवार की पूजा करने के लिए मना किया गया एवं इतना ही नहीं उस परिवार को मारपीट कर गांव से बहिष्कृत कर दिया गया।

ग्राम के सरपंच का इतना हौसला कि ग्रामीणों के साथ मिलकर महिला को नीचे जात का होने की वजह से अपमानित किया गया जिसका वीडियो केवल cgtop36 के पास है। मामले में महिला एवं उसके पति ने Cgtop36 के संवाददाता को रोते रोते बताया एवं इस घटना का वीडियो साझा किया है। बताया जा रहा है कि 1 महीने से पीड़ित परिवार गांव से निकाले जाने के बाद किसी दूसरे गांव में जाकर रह रहे थे।

पूरा मामला सरायपाली के ग्राम पंचायत बाराडोली का है जहां सरपंच उपसरपंच एवं कुछ दबंगों द्वारा एक परिवार को गाँव से मारपीट कर भगाने का मामला सामने आया है। इस कोरोना महामारी और लाॅकडाउन में भी पीड़ित परिवार दूसरे गाँव में रहने को मजबूर हैं।

ग्राम बाराडोली की एक परिवार ल अगरबती मुन्ना पति रमेश मुन्ना द्वारा संवाददाता को बताया गया कि सावन के पहले सोमवार को गाँव के शिव मंदिर में पूजा करने उनका परिवार गया हुआ था वहीं गाँव के सरपंच एवं उसके साथियों द्वारा उन्हें छोटी जाति का कहकर गाली गलौच और मारपीट कर मंदिर से भगा दिया गया। जिसके बाद पीड़ित परिवार ने सरायपाली थाने में आकर शिकायत की। उसके बाद थाने में दोनों पक्षों को समझाइश दी गई और रजामंदी कर जाने के लिए कहा गया।उसके दूसरे दिन सरपंच और उसके साथियों द्वारा गाँव में मीटिंग बुलाकर प्रार्थी और उसके परिवार के लोगों के साथ मारपीट कर गाँव छोड़कर भाग जाने के लिए कहा गया।

हताशा से घिरे मुन्ना परिवार के पास कोई चारा नहीं था।बेबस परिवार दबंगों के डर से आखिर जाए कहाँ, पुलिस तो पहले ही दबंगो को समझा चुकी थी पर दबंग तो ऊंच जाती का हवाला दे दंभ में थे। आखिरकार थक हारकर मारपीट के डर से दूसरे गाँव में परिवार रहने लगा।

छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली त्यौहार को छत्तीसगढ़ का अपना त्यौहार कह कर आम जनता और पूरे छत्तीसगढ़ में लोगों के साथ हर्षोल्लास से मनाया तो पीड़ित परिवार को भी अपने गांव में जाकर हरेली मनाने की इच्छा हुई। हरेली का त्योहार मनाने जब गाँव लौटा उसके दो दिन बाद फिर से सरपंच ने परिवार को लेकर गाँव मे मीटिंग बुलाया।

मीटिंग में पीड़ित ने रोना भी रोया कि कोरोना और लाॅकडाउन जैसी स्थिति में मैं अपने परिवार के साथ कहाँ जाऊँ। पीड़ित ने बताया कि मेरी बात उन्होंने नहीं मानते हुए मुझे गाँव से भगा दिया जिसकी शिकायत कर दिनांक 03 अगस्त को मेरे द्वारा थाना सरायपाली और अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन दिया गया है।

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