नदी किनारे उगती है ये संजीवनी, पथरी, दांत दर्द और अस्थमा से दिलाये छुटकारा

satyanashi ke Fayde: आयुर्वेद में सत्यानाशी का पौधा बड़ा महत्व रखता है. इसके फूल, पत्तियां और बीज कई रोगों की रामबाण दवा हैं. अस्थमा के मरीज इसका सेवन कर जल्द से जल्द दुरुस्त हो जाते हैं।
दमोह जिले के जंगलों में ऐसे हजारों पेड़-पौधे और घास मौजूद हैं, जिनका उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है. आयुर्वेद में ऐसे पेड़-पौधों को बहुत महत्व दिया जाता है. अक्सर जब जड़ी-बूटियों की बात होती है, तो तुलसी, गिलोय या आंवला की सबसे ज्यादा बात होती है. लेकिन कई ऐसे पौधे हैं, जिनको बहुत अधिक महत्व नहीं मिल पाता. ऐसा ही एक पौधा है सत्यानाशी का, जिसमें एंटी अस्थमा के गुण पाए जाते हैं. जिसे लोग कई नामों से जानते हैं. कुछ जगहों पर लोग इसे कंटकारी, तो कुछ जगहों पर भटकटैया कहते हैं. जबकि आयुर्वेद में इसे सत्यानाशी के नाम से जाना जाता है.
नदी नालों के पास खिलते हैं इसके पीले फूल…सत्यानाशी की पहचान इसके पीले फूल, कंटीले पत्ते और फूलों के अंदर मौजूद काले, हल्के लाल बीज होते हैं. खासकर ये औषधीय गुणों से भरपूर माने जाने वाला पौधा शीतांत वाली जगहों पर उगता है. जैसे नदी, नाले, तालाब या पानी से भरे खेतों के किनारे ये स्वतः ही उग आता है.
कई प्रकार के रोगों से मुक्ति दिलाने में कारगर आयुर्वेद पत्तियों का काढ़ा पीने से अस्थमा सही हो जाता है. इसके साथ ही इसका अर्क लेने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है. इसके दूध को पानी में मिलाकर सेवन किया जा सकता है. इसके बीजों का धुआं लेने से दांत का दर्द एवं कीड़े गायब हो जाएंगे. इसकी जड़ का उपयोग पथरी के इलाज के लिए किया जाता है. सत्यानाशी पूरा पौधा ही अमृत के समान है, इसकी जड़ और फल का उपयोग कई प्रकार की दवाओं को बनाने में किया जाता है. इसका पाउडर 1 से 3 ग्राम, काढ़ा 40 से 80 मि.ली लेना सुरक्षित माना जाता है.




