Breaking News

अंधविश्वास – यह ऐसा विषय है जिस पर जितनी चर्चा की जाए यह कम


आज डा.वाघ की वाल पर मै अभी सोशल मीडिया मे चल रहे अंध विश्वास पर ही बात करूंगा ।  यह ऐसा विषय है जिस पर जितनी चर्चा की जाए यह कम है ।  वैसे अंधविश्वास किसी एक धर्म मे ही है ऐसा नही है यह सभी धर्म मे है । पर दुर्भाग्य यह है की अंधविश्वास पर काम करने वालो को अंधविश्वास पर सबसे ज्यादा काम करने का आनंद सिर्फ हिंदूओ के धर्म मे ही आता है । इसके दो कारण है यह धर्म अच्छी बातो को परिवर्तन करने के लिए तैयार रहता है ।  दूसरा सबसे अहम बात यह यहा कुछ भी कह लो कोई विरोध करने वाला नही है जिसका सब  बेजा फायदा उठाते है ।  इस पर काम करने वाले कभी यह बता दे की कभी दूसरे धर्म मे भी इस पर काम किया है ।  यहा यह लोग कभी काम करने की हिम्मत नही करते क्योकि उस विरोध के लिए यह लोग मानसिक रूप से तैयार नही रहते । वही यह भी देखा गया इस अंधविश्वास को खत्म करने के लिए दूसरे धर्म की रूचि यह समझ से परे है । कोई फायदा है जिसके कारण इन लोग इस पर दोनो मिलकर काम करते है ।  कभी-कभार भी यह समाचार नही बनता की कही अन्य धर्म मे भी काम किया है । चलो मै उस अंधविश्वास पर ही आ जाऊ कुछ हद तक मेरे जैसा बंदा भी इन पर विश्वास करने के लिए मजबूर हुआ है । मै यह मानने के लिए भी तैयार हू इसके बाद यह समाधान न देकर अपना आर्थिक लाभ लेते है तब यह लोग विवाद मे आते है । इन्हे अपने शक्ति पर यह जरूरत से ज्यादा विश्वास बाद मे इन्हे झूठा भी साबित करती है यह मैने देखा है थोडी सी तकलीफ तो  होती है । पर यह जरूर है इन्हे कौन सी शक्ति है मुझे नही मालूम पर है यह स्वीकार करने  मे मुझे कोई संकोच नही है । इन्हे यह शक्ति प्राप्त है इस पर संदेह भी नही किया जा सकता यह बात मेरी देखी भी हुई है । इतने बडी भीड मे किसी भी बंदे को बुलाकर बिल्कुल उसके मन की बात सौ प्रतिशत बताना यह कोई कम बडी बात नही है । किसी समय मै भी एक भीड का हिस्सा था मुझे बुलाकर पूरी बात बताई तो मै कैसे न विश्वास करू ? पर यह भी जरूर है की पूरा फायदा होगा वह नही हुआ जिसे मैने पहले भी लिखा है । कुछ बात मैने अपने दैनंदिन प्रेक्टिस मे देखा है और वह देखने के बाद मै कैसे उस पर विश्वास न करू । आज से चालीस साल पहले मेरे पास एक शिक्षक को लकवा मार दिया फिर उसे इलाज के लिए मेरे पास आए ।  मैने देखने के बाद उन्हे तत्कालीन डी के हास्पिटल मे जाने की सलाह दी उन्हे लेकर उन लोग डीके हास्पिटल मे भर्ती कराया करीब दो माह बाद जब उन्हे लाभ नही हुआ तो सेक्टर नाइन के भिलाई हास्पिटल मे भर्ती कराया गया । पर दुर्भाग्य से वहा भी ठीक नही हुए ।  जब इलाज से आदमी ठीक नही होता तो फिर हर कोई दूसरा रास्ता ढूंढने लगता है । फिर यही काम सर ने किया रास्ता ढूंढ ही लिया और स्वस्थ हो गए।  कुछ समय बाद सर आये तो मुझे उन्होने कह ही दिया क्या डा.साहब आप लोग-बाग ने तो ठीक नही किया मैने सिर्फ तीन नींबू दिया और उसे मुझे फूंका और मै वहां से बिल्कुल स्वस्थ होकर पैदल चलते मै वहा से निकला हू ।  मैने तब अंधविश्वास वालो को उस समय सर जीवित थे तो मिलने को कहा जिससे उनसे ही इस बात की तस्दीक कर ले पर इन लोग नही मिले । कोई शिक्षक क्यो झूठ बोलने लगे । यह ऐसी दुनिया है जहा बहुत मात्रा मे झूठ समाहित है पर कुछ मात्रा मे वह सच भी समाहित है जिसे हम नकार नही सकते ।  आज भी हम सात सौ साल पहले की नासत्रोदम की भविष्य वाणियो को मान रहे है  क्योकि वह पश्चिम का है पर अपने देश के ज्योतिषीय पर संदेह करते है । आज भी हमारा पंचांग नासा को चुनौती दे रहा है जिसे कोई स्वीकार करने की हिम्मत नही है ।  लोग अंधविश्वास के विरोध मे कार्य करने वालो पर तब विश्वास करेंगे जब तक यह अपने को एक ही धर्म तक सीमित न रखे ।  जब सब जगह यह आवाज सुनाई देना भी उतनी ही निहायत जरूरी है ।  मुझे यह स्वीकार करने मे कुछ लोग इसका फायदा उठाकर अपने निजी हित साध लेते है जो भर्त्सना के योग्य है ।  पर उस सिद्धी को भी हमे स्वीकारना होगा जो इन्हे मिली हुई है । मैने किसी लेख मे भी इसका उल्लेख किया था एक सिंधी व्यापारी ने बातो ही बातो मे कहा आप कुछ भी सोचिए मै बता दूंगा मुझे तो विश्वास नही हुआ मै हैरान हो गया जो मैने सोचा था उसने वही बात बता दी मैने सोचा था मै नौ शादी करूंगा जो कभी कोई सोच नही सकता ।  चलो बागेश्वर धाम ने चुनौती दे ही दी है अब दूध का दूध पानी का पानी हो जाए । यह धर्म आज भी परिवर्तन को बदलने के लिए तत्पर रहता है । यह विषय इतना बडा और व्यापक है जितना इस पर लिखू कम है ।  मैने क्या सभी लोगो ने नवरात्र पर जवारा मे भक्तो को सोंठा लेते देखा होगा वही मुंह से भाला से छेदकर एक तरफ से दूसरे तरफ निकालकर जवारा के साथ चलना आज भी जारी है ।  मात्र उसे एक नींबू लगाकर निकाल दिया जाता है ।  न खून निकलता है न उसे दर्द का अहसास होता है । इसे क्या माना जाए न इसको कोई चुनौती मिलती है न प्रश्न खडा करते है ।  मै इसके बाद भी उन बाबाओ का जरूर उल्लेख करूंगा जो समस्या तो पढ लेते है पर उन असाध्य मरीज को अपने दरबार मे बुलाकर ठीक नही कर पाते यह उनके साथ ज्यादती है । जो गलत है ।  यह लेख जो मैने देखा है उसे लिखा है मेरे प्रबुद्ध मित्र उस पर और अच्छे से प्रकाश डालेंगे ।  अगर कोई गलत परंपरा है तो उस पर मै अंधविश्वास के साथ हू जिसे बदलना होगा ।  वही जो दैवीय शक्ति है उसे भी बडे मन से स्वीकार करना होगा जिसे अंधविश्वास के कारण हम नही स्वीकार कर पाते ।
देखो अब रायपुर मे क्या होता है ।  दोनो का उद्देश्य समाज का भला करना ही है रास्ते अलग-अलग है । 
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ





Related Articles

Back to top button