
गिरीश गुप्ता गरियाबंद- खेती किसानी का सीजन आते ही बिना लाइसेंस,, अवैध खाद बीज दवाई बिक्री का कारोबार गांव गांव में सजने लगा है .यह अवैध कारोबार विभागीय कार्यवाही के अभाव में तीन माह तक खूब फलता फूलता है जिसकी शुरुआत अब हो चुकी है। इस अवैध कारोबार के बड़े खिलाड़ी देवभोग , मैनपुर , छुरा के ओडिशा बॉर्डर वाले इलाके में अधिक डेरा जमा कर हर साल करोड़ो का व्यापार करते हैं ।
अवैध कारोबार का तार देवभोग और मैनपुर , छुरा मुख्यालय से भी जुड़े हुए है ।
सकड़ किनारे बड़े बड़े गांव में भी बिना लाइसेंस के सीड्स , पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर का बिक्री बाकायदा बड़े गल्ला दुकान , गोडाउन के व छोटे छोटे दुकान के आड़ में धड़ल्ले चलता है ब्लॉक में बैठे जिम्मेदार वरिष्ठ कृषि अधिकारी इस कारोबारियों के जानकारी नहीं होने की बात कहते हुए पल्ला झाडटे नजर आ रहे है जबकि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी गांव गांव में किसानों के बीच संपर्क में रहते है विभागीय योजनाओं की जानकारी देते रहते है गांव की कृषि संबंधित सभी हल चलो से वाकिफ रहते हैं।
ऐसे में खाद, बीज , दवाई के अवैध कारोबार की जानकारी विभाग को नहीं होने के कथन को कैसे सच माना जा सकता है विभाग के उच्च अधिकारी के सुस्त रवैया और स्थानीय अधिकारियों के सेटिंग के चलते शासन और किसानों को हानि हो रहा है
उधारी देने की आड़ में किसानों से डेढ़ गुना लूटने का खेल
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शोभा गोना और देवभोग के उड़ीसा बॉर्डर वाले वह क्षेत्र जहां मक्के की पैदावार अधिक होती है वहां पर अवैध बीच कारोबारी किसानों को पूर्व में खाद और बीज उधारी देकर फसल तैयार होने पर डेड गुना वसूली करते हैं जिसके चलते किसानों की स्थिति आज तक नहीं सुधर पाई और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी है
बिना लाइसेंस बिक रहे सामग्री में गुणवत्ता मुनाफा और गुणवत्ता का खेल
इस तरह के अवैध कारोबार में लिप्त बड़े खिलाड़ियों द्वारा बिना लाइसेंस के कारोबार कर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगा रहे हैं अधिक मुनाफे के लिए
गुणवत्ता विहीन बीज और खाद बेचा जाता है जिसके कारण पैदावार कम होता है और जागरूकता के अभाव में किसानों द्वारा मौसम या अन्य कारणों से पैदावार कम होने की बात को स्वीकार कर लिया जाता है
सबसे बड़ा सवाल क्यों खरीदना पड़ता है बिचौलियों से खाद और धान बीज
शासन द्वारा किसानों के खाद बीज और कीटनाशक दवाइयों के लिए व्यवस्था किया गया है परंतु जटिल प्रक्रिया और कुछ सोसायटीमें दलाली प्रथा ,,, छोटे किसानों के रकबा कम होने और अधिकतम दूरी के चलते ,, गांव में उपलब्ध व्यापारियों के लुभावने उधारी वाले स्कीम में आकर मजबूरी में अवैध कारोबारियों के चुंगल में फंस जाते हैं
देवभोग विकासखंड के इन गांव मे चलता है अवैध कारोबार का खेल
झाखरपारा , झिरिपनी , कोखसरा,गिरसुल, सिनापाली, कैटपदर घूमरगुड़ा, फालसापारा, सितलीजोर , गड़ाघाट , नंगल्दी , धुरवापारा ,
मैनपुर विकासखंड के इन गांव में है बड़े कारोबारी
उरमाल , गोहरपदर , झारगांव , ढोरर्रा, इंदागाव,कोयबा,सरनाबहाल ,चिखली , धनोरा , बुरजाबहाल, अमलिपदर , धुरवगुड़ी , साइबिन कछार , झारियाबाहरा , कोकड़ी, गोना, सोभा, बामनीझोला , घुमरापदर, छुरा विकासखंड में रसेला, नयापारा , कोसमी , के भी चल रहा है बिना लाइसेंस का कारोबार
क्या कहते है विकास खंड के जिम्मेदार अधिकारी
बिना लाइसेंस के चल रहे कारोबार की जानकारी मुझे नहीं है.निरीक्षण टीम और खाद्य स्पेक्टर नियुक्ति के लिए लिए डी डी ए कार्यालय से आदेश अभी प्राप्त नहीं हुआ है उच्च कार्यालय से आदेश प्राप्त होगा तो कारवाही किया जाएगा श्री नाग वरिष्ठ कृषि अधिकारी देवभोग.अभी कुछ दिन पहले ही मैंने चार्ज लिया है पर लिस्ट देख लेता हूं किन के नाम से लाइसेंस जारी हुआ है उसके बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
रामजी साहू वरिष्ठ कृषि अधिकारी मैनपुर
हमारे यहां अवैध नहीं बिकता और मैं ज्यादा झंझट में नहीं पड़ता मेरा कुछ ही दिनों में रिटायरमेंट होने वाला है ( दीवान वरिष्ठ कृषि अधिकारी छुरा)




