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रायगढ़ के डीबी.पावरप्लांट पर धड़ल्ले चल रहा करोड़ों रुपये का अवैध फ्लाईऐश डम्पिंग, जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कह रही बहुत कुछ

रायगढ़। जिले में फ्लाईऐश का निष्पादन एक बहुत बड़ी समस्या है। इसके हानिकारक प्रभाव होने के कारण शासन द्वारा इस के निष्पादन के लिए कड़े नियम बनाए गए है। बिना अनुमति के इनका परिवहन और निष्पादन अवैध माना जाता है। एक तरफ जिला खुद फ्लाईऐश के विपरीत प्रभाव झेल रहा है। ऊपर से प्रशासनिक शून्यता के कारण दूसरे जिले से भारी मात्रा में बिना किसी अनुमति के रायगढ़ जिले में फ्लाई डंप हो रहा है। यह घातक फ्लाईऐश जांजगीर – चाम्पा जिला के डभरा ब्लाक, ग्राम बाड़ादरहा, कंवाली स्थित डीबी पॉवर लिमिटेड रायगढ़ जिला स्थित गुड़ेली के खदानों में रोजाना सैकड़ों टन खपाया जा रहा है। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अभी इस फ्लाईऐश को लेकर प्रशासन द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है सिर्फ आवेदन के आधार पर ही ऐसा किया जा रहा है।


आधा दर्जन से अधिक ट्रांसपोर्टरों को डीबी पॉवर ने दे रखा है गुड़ेली खदान में डंपिंग का ठेका

डीबी पावर के द्वारा गुड़ेली के खदानों में जाने के लिए ट्रांसपोर्टरों को बाकायदा एक चालान पर्ची बनाकर दिया जा रहा है। जिस पर ट्रांसपोर्ट कंपनी का नाम भी लिखा है। डम्पर में ओवरलोडेड फ्लाईऐश भी मौके पर देखें गए। जब हमने डम्फर चालकों से डिटेल जानने की कोशिश की तो उनके द्वारा वहीं बताया गया जो उन्हें सीखा कर भेजा जाता है। “हमें नहीं मालूम साहब हम तो ड्राइवर हैं। हमें अनुमति की जानकारी नहीं है। डीबी पावर से फ्लाईऐश लोड कर हमें यह पर्ची दिया जाता है और इसी पर्ची को लेकर हम गुड़ेली खदान जाते हैं और फ्लाईऐश वहां गिरा देते हैं इसके अलावा हमें कुछ नहीं मालूम।”

आइए जानते हैं किन-किन ट्रांसपोर्टरों को डीबी पावर से फ्लाईएश डंप करने का दिया गया है ठेका

डीबी पावर प्लांट में जिन ट्रांसपोर्टरों को फ्लाईऐश को खपाने का ठेका दिया गया है। उनमें से किसी को भी विधिवत अनुमति विभाग से नहीं मिला है। जिन डंपर चालकों से हमने बात की उन्होंने हमें चालान दिखाया। चालान पर्चियों पर हमने नजर दौड़ाई तो आधा दर्जन से अधिक ट्रांसपोर्टरों के नाम सामने आए हैं। संधू ट्रासपोर्ट, गो डार्ट लॉजिस्टिक, मां चंद्रहासिनी ट्रांसपोर्ट, जीबी लॉजिस्टिक, क्लूज प्राइवेट लिमिटेड, मां शक्ति मिनरल्स, श्रीराम ट्रांसपोर्ट इन सभी ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियां डीबी पॉवर से निकलकर गुड़ेली खदान जा रही थी।

गांवों में प्लांट द्वारा नियुक्त बलशाली लोग डंफरों की करते हैं एंट्री और खदान तक गांव से डंफर को निकालने में करते हैं मदद

प्लांट से फ्लाईऐश लेकर दर्जनों गांव की सड़कों में धड़ल्ले से दौड़ रही है। धुरकोट व बघोद के पास ग्रामीण गाड़ियों को रोककर विरोध भी जताते हैं लेकिन प्लांट अपने पावर का इस्तेमाल कर उनकी आवाज को दबा दे रहें हैं। पेण्ड्रवा, अमलडीहा, डोमनपुर के रास्ते में इन गाड़ियों की 24 घण्टे आवाजाही हो रही है। कई गांव के ग्रामीणों द्वारा इस बात का विरोध भी किया गया है लेकिन इस बात का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस मामले में ग्रामीणों ने बताया है कि :

“तेज चलती हुई डंपर कई घरों में भी घुस चुके हैं और सड़कों को भी बर्बाद कर रहे हैं। सड़क किनारे लोगों का चलना दुश्वार हो गया है। हमारी कोई नहीं सुन रहा हैं जनप्रतिनिधियों ने खामोशी की चादर ओढ़ रखी है। सब कुछ आंख के सामने घटता देखने के बावजूद भी सरकारी अमला कुछ नहीं कर रहा है। ग्रामीणों ने अपना विरोध भी जताया लेकिन प्लांट के सामने उनकी एक नहीं चली। प्लांट से फ्लाईऐश लेकर निकलने वाले डंफरों को सही सलामत खदान तक पहुंचाने के लिए बकायदा प्लांट ने क्षेत्र के नामचीन व बाहुबली लोगों को निरीक्षण के लिए जिम्मा दिया और उनके द्वारा ग्राम केनाडीपा, ओढ़ेकेला, धुरकोट, मिरौनी क्षेत्र में डंफरों की एंट्री किया जा रही है।”

डीबी पॉवर से निकलकर गुड़ेली जाने के लिए जितने भी गांव को पार करके डम्फर जा रही है। उस सड़क पर सिंधु ट्रांसपोर्ट की सबसे अधिक डम्फरें चल रही हैं। गो डॉट लॉजिस्टिक, जीबी लॉजिस्टिक, श्रीराम ट्रांसपोर्ट, मां चंद्रहासिनी ट्रांसपोर्ट, शक्ति मिनरल्स भी इस अवैध कार्य को धड़ल्ले से अंजाम दे रहा है। डीबी पावर ने इन ट्रांसपोर्टरों को ठेका तो दे दिया गया लेकिन कितनी मात्रा के परिवहन के अनुमति ली गई इसकी कोई जानकारी नहीं है। इन ट्रांसपोर्टरों को पर्यावरण विभाग से अनुमति ही नहीं मिली है। उनके द्वारा सिर्फ आवेदन प्रस्तुत किया गया है और धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है। लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। परिवहन के मानक मापदंडों का भी कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। ओवरलोड गाड़ियां, पूरी तरह से तिरपाल से बिना ढके हुए परिवहन की जा रही है जिससे उनकी राख सड़क पर और हवा में मिलकर वहां की आबोहवा को प्रदूषित कर रहे हैं।

क्या कहते हैं डीबी पावर के अधिकारी

इस मामले में जब हमने डीबी पॉवर के अधिकारी हरिओम से बात की तो उन्होंने बताया कि ‘डीबी पावर गुड़ेली में विधिवत फ्लाईऐश डंपिंग कर रही है’ लेकिन अनुमति पत्र दिखाने के विषय में हमने उनसे थोड़ा और चर्चा किया तो कम्पनी की पोल खुल गयी। उन्होंने कहा ‘ पर्यावरण विभाग में हमने अनुमति के लिए आवेदन लगाया है: फिर गोल मोल जवाब मिलने लगा।

क्या कहते हैं रायगढ़ के पर्यावरण अधिकारी

इस विषय में जब हमने पर्यावरण अधिकारी से बात की तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि “हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं है अगर डीबी पावर द्वारा ऐसा कुछ किया जा रहा है तो हम इसकी जांच करेंगे।”

क्या कहते हैं सारंगढ़ एसडीएम

इस विषय में जब हमने सारंगढ़ एसडीएम नन्दकुमार चौबे से बात की तो उन्होंने कहा – “फ्लाईऐश का मामला पर्यावरण विभाग का है। हम पर्यावरण विभाग को इस पर कार्यवाही करने के लिए कहेंगे।”

अधिकारियों के शब्दों में है प्रश्नचिन्ह ?

जब डीबी पावर के अधिकारी हरिओम स्पष्ट रूप से यह कह रहे हैं कि हमने अनुमति के लिए आवेदन लगाया हुआ है तो फिर बिना अनुमति के इतना बड़ा काम कैसे हो गया ? ग्रामीणों का उठता हुआ आवाज दबा दिया जा रहा है। क्या प्रशासन को इन सब चीजों की अभी तक भनक नहीं लगी है ? हजारों टन प्लांट का माल दूसरे जिले से रायगढ़ जिले में खपाया जा रहा है और जिले के अधिकारियों को इसकी भनक भी नहीं है क्या यह संभव है ? ये प्रश्न स्वत: ही अब उठने लगे हैं। प्रशासन को यह बात समझ में क्यों नहीं आ रही है की जिस गति से जिले में अवैध फ्लाईऐश डंप किया जा रहा है। उससे पर्यावरण के साथ साथ इंसानी एवं जीव जंतुओं को अत्यधिक नुकसान हो रहा है। जल – जीवन बेहद प्रभावित हो रहे है। फ्लाईऐश के कारण लोगों का जीना दुश्वार हो रखा है फिर भी प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की खामोशी समझ से परे है।


पर्यावरण प्रदूषण के रोकथाम एवं अवैध कार्यों पर कंट्रोल करने के लिए जिला कलेक्टर ने एक ज्वाइंट एक्शन टीम का निर्माण किया है। जिसका काम सड़कों पर कोयले और फ्लाईऐश का परिवहन करने वाले वाहनों की कड़ाई से जांच करना है लेकिन इस क्षेत्र में अभी तक इस टीम ने अपने पांव तक नहीं रखें हैं। जिसका नतीजा यह है कि डीबी पॉवर प्लांट पर सरकार का किसी प्रकार का कोई नियंत्रण नहीं है और प्लांट प्रबंधन धड़ल्ले से अपने प्लांट का फ्लाईऐश अवैध तरीके से डंप कर रहा है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि कई ट्रांसपोर्टरों ने लात नाला के किनारे में फ्लाईऐश पाट दिया है। पर्यावरण विभाग ने फ्लाईऐश की समस्या से मुंह मोड़ लिया है और बिल्ली की तरह आंख बंद कर अपना काम कर रही है ये सोचकर कि इन्हें कोई नहीं देख रहा है।

खामोशी पर उठे सवाल

बहरहाल प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि हमें अब तक इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन मामले में अवगत करा देने के बाद भी एक हफ्ते बाद भी कोई खास कार्यवाही नहीं हुई। 19 अगस्त तक को जब यह मामला हमारे संज्ञान में आया तब बिना किसी विधिवत परमिशन के सिर्फ आवेदन के आधार पर ही इन वाहनों का परिवहन किया जा रहा था। इसकी मौखिक जानकारी संबंधित अधिकारियों तक जा चुकी थी। उसके कुछ दिन बाद अखबारों में भी यह खबर भी छपी.. लेकिन फिर भी यह खामोशी या चुप्पी उस ओर इशारा करती है जिसके लिए यह विभाग और यहां के जिम्मेदार मशहूर हैं 

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