
गिरीश गुप्ता मैनपुर : देवधारा जलप्रपात छत्तीसगढ़ गरियाबंद जिले की मैनपुर से गरीब 35 किलोमीटर घनघोर उदंती के जंगलों में स्थित है देवधारा नाम सुनते ही कोई आध्यात्मिक देवी स्थल से संबंध होता प्रतीत होता है देवधारा जलप्रपात पौराणिक मान्यता अनुसार भगवान राम के बनवास के कुछ पल इन्हीं देवधारा के वादियों में व्यतीत किए गए थे जिस वजह से इस विशाल जलप्रपात का नाम देवधारा जलप्रपात पड़ा देवधारा जलप्रपात यूं तो प्राकृतिक सुंदरता से भरी हुई है चारों तरफ हरी-भरी खूबसूरत वादियां लगता है जीता जागता स्वर्ग का अनुभव होता है देवधारा की आकर्षक इतनी कि लोग दूर-दूर से देवधारा के इन वादियों को देखने बरबस ही खींचे चले आते हैं आए दिन सैलानियों की भीड़ देवधारा की भूमि पर भरी रहती है
देवधारा दुर्गम पहाड़ी रास्ते Adventure Experience Devdhara
देवधारा जलप्रपात को देखने निहारने इसकी खूबसूरती का लुफ्त उठाने देश विदेश के लोग यहां पहुंचकर अपने जीवन के कुछ सुखद पल इन वादियों के साथ बिताते हैं देवधारा जलप्रपात में अब तक कई लोग पिकनिक, सैलानियों, यूट्यूब चैनल वाले, डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली फिल्म बनाने वाले आते रहते हैं पर यहां तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती हमेशा बना रहता है सैलानियों को बहुत समस्याओं का सामना करके देवधारा तक पहुंच रहे हैं उदंती का घनघोर जंगलों के बीच बड़े-बड़े पहाड़ियां पत्थरों से होकर ही देवधारा तक पहुंचा जा सकता है
मैनपुर से धूमर पड़व मार्ग लगभग 35 किलोमीटर जंगलों से गुजर कर जाना कोई चुनौती से कम नहीं है अकेला आना जोखिम साबित हो सकता है बेहतर होगा आप लोग टीम बनाकर आएं यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्ते से आना रहता है भूल भुलैया ज्यादा है जंगली जानवरों का भी खतरा है मोटरसाइकिल से जाना आसान होगा ना कि चार पहिया से चार पहिया कुछ दूरी पहले छोड़कर आना होगा लेकिन जब आप इतनी चुनौती को पार कर लेंगे तभी देवधारा की खूबसूरती को अपने आंखों में निहार सकेंगे देवधारा के adventure का मजा ले सकेंगे
देवधारा की हैरान करने वाली ऐतिहासिक रहस्यमई कथाएं
देवधारा जलप्रपात की सदियों पुरानी रामायण कालीन कथाएं स्थानीय लोगों द्वारा बताई गई है कि देवधारा की इस पावन भूमि पर कभी भगवाना श्री राम जानकी लक्ष्मण अपने वनवास काल के समय यहां आए थे यहां उनकी आने का कुछ साक्ष्य प्रमाण भी है ऐसा स्थानीय लोग बताते हैं जैसे कि पद चिन्ह, सीता स्नान कुंड, बैठने की चौकी, और भी बहुत कुछ लेकिन इनमें से कई चिन्नरी कुंड के अंदर होने के दावे किए जा रहे हैं दरअसल इनका साक्ष्य है या नहीं आधिकारिक तौर पर कहीं पुष्टि नहीं किया गया है इसके अलावा भी कई मान्यताएं देवधारा को लेकर बताए जा रहे हैं लिखे तो शब्द कम पड़ जाएंगे
देवधारा की कुंड में सोने की मछली का दावा
गरियाबंद जिले पर स्थित देवधारा जलप्रपात की जितनी तारीफ करें कम होगा जिले में कई प्रसिद्ध व बड़े जलप्रपात प्रकृति ने दिए हैं पर देवधारा की बात है कहीं जाए तो लाजवाब है लगभग 100 fit करीब से पानी गिरता है फव्वारे उड़ते हैं जो कि नीचे विशाल कुंड में जाकर मिलते हैं जिसे देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ता है हालांकि यह झरना 12 महीने बहता है पर सैलानियों के लिए सितंबर से जनवरी फरवरी का महीना उत्तम है गर्मी के दिनों में पानी कम रहता है और जुलाई अगस्त के महीने में जाना संभव नहीं है जान जोखिम हो सकता है क्योंकि रास्ते ठीक नहीं है दूसरा पहाड़ियों से फिसलने का खतरा ज्यादा बना रहता है खासतौर पर बरसात के दिनों में.

अगर हम बात करें तो कुंड की विशेषता की तो काफी रोमांचक और अचरज भरी है जानकारी अनुसार अब तक कुंड की गहराई किसी को पता नहीं चल पाया है अता खाई बताया जा रहा है कुछ वर्ष पहले गोताखोरों द्वारा गहराई नापने कुंड पर उतरे थे पर तह तक जाने में असफल रहे इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कुंड की गहराई कितनी हो सकती है कुंड काफी बड़ा है
वहीं दूसरी ओर सबसे अचराज्य हैरान कर देने वाली पुरानी मान्यता है कि इस पूर्ण में एक विशालकाय मछली है जो कि सोने के कुंडल आभूषण अलंकार धारण की हुई है उसे मछली नहीं बल्कि देवता के रूप में पूजा किया जाता है और जिसको भी यह मछली पानी में तैरता दिखा तो मानो उसकी किस्मत खुल गया उस देवरूपी मछली को देखने से जीवन के सभी काल कष्ट दूर हो जाते हैं मनोकामनाएं पूरी होती है मनुष्य के जीवन में सुख समृद्धि व शांति का संचार होने लगता है पर अब तक उस मछली को कितने लोग देख पाए हैं सवाल बरकरार है स्थानीय लोगों द्वारा देखे जाने की दावे किए जाते रहते हैं
देवधारा पर्यटन स्थल पर सरकारी व्यवस्था
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा देवधारा को पर्यटन स्थल का दर्जा दिया गया है और बड़े तादाद में पर्यटक देवधारा को देखने एक्सप्लोरर करने आते रहते हैं रही बात है व्यवस्था की तो कोई खास व्यवस्था सरकार की ओर से नहीं दिखाई दे रहा है यही एक वॉच टॉवर है काफी पुरानी और नव निर्माण कक्ष है जिसमें की आने जाने वाले कुछ पल पल रुक सकते हैं लेकिन रात गुजर ना मुनासिब नहीं है अन्य पर्यटन स्थलों में जिस तरह का साजो श्रृंगार देखने को मिलता है देवधारा में अधूरा सा लगता है देवधारा में अन्य देवी देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर बनी हुई है इसके अलावा कोई बड़ा डेवलपमेंट बिल्डिंग या स्ट्रेक्चर देखने को नहीं मिलता है इसका दूसरा वजह यह भी है कि यह इलाका काफी दुर्गम है जिस वजह से शायद है कंट्रक्शन का कार्य नहीं हो पा रहा हो क्योंकि इस कार्य में काफी सारे सीमेंट गिट्टी के अलावा सामानों की जरूरत होता है जिसे लाना मुश्किल है पर हम यह भरोसा कर सकते हैं कि आने वाले दिनों में जिला प्रशासन या छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा देवधारा जलप्रपात में नए-नए टूरिज्म के लिए बिल्डिंग होमस्टे गार्डन स्ट्रक्चर आने जाने के लिए सड़क आदि सुविधा बन सके जिससे कि लोग यहां बार-बार आते रहे देवधारा के मनोरम दृश्य देखते रहे
देवधारा की पहाड़ियों के नीचे छोटे-छोटे गांव कस्बे हैं जिससे खुदा ना करें अगर किसी को कुछ समस्या हो या मदद की आवश्यकता हो तो गांव वाले से मदद ले सकते हैं बड़े ही दया व सुविचार मददगार लोग रहते हैं हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था जिस वजह से हम यह बात आपको बता रहे हैं
प्रकृति का अनमोल तोहफा है देवधारा
पहलीखंड समीप पहाड़ी पर स्थित है देवधारा जलप्रपात प्रकृति का खूबसूरत बेशकीमती तोहफा है झर झर करती झरना कल कल की आवाजें कुंड में लहराती सागर की भांति निर्मल जल का धार पत्थरों का बनावट बरबस ही लोगों को खींच लिया जाता है वही ऊंचे ऊंचे पहाड़ी हरे-भरे वादियां लंबे-लंबे विशाल वृक्षों चिड़ियों की मधुर ध्वनि मानो जीते जी स्वर्ग का अनुभव होने लगता है इस अनमोल तोहफा को उसकी सुंदरता को संजो कर रखना सभी पर्यटक को सैलानियों का कर्तव्य भी बनता है
क्योंकि आज आप हो कल कोई दूसरा आएगा अपनी खाने पीने की चीजों को छोड़ नहीं गंदगी ना फैलाएं बेहतर होगा आप अपने साथ दूर ले जाकर फेंके या अपने निगरानी में जलाएं जिससे कि और कोई दूसरा आए तो उसको साफ सुथरा महसूस हो जिस विचार को लेकर आया था उससे कई गुना बेहतर नजारे उसे देवधारा पर देखने को मिले यही आप से कामना करते हैं उम्मीद करते हैं.




