किसानों के फ़सल के लिये संजीवनी साबित होने वाले नैनो यूरिया की क्या है? खासियत, और कब तक पहुँचेगा किसानों के हाथों में नैनो यूरिया जानिये..

इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने 31 मई, 2021 को नई दिल्ली में हुई प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की 50वीं वार्षिक आमसभा की बैठक के दौरान इस उत्पाद को दुनिया के सामने पेश किया इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नैनो यूरिया तरल की अपनी पहली खेप किसानों के उपयोग के लिए उत्तर प्रदेश भेजी है.
इफको की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई. नैनो यूरिया तरल एक नया और अनोखा उर्वरक है जिसे दुनिया में पहली बार इफको द्वारा गुजरात के कलोल के नैनो बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में पेटेंटेड तकनीक से विकसित किया गया है.इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने 31 मई, 2021 को नई दिल्ली में हुई प्रतिनिधि महासभा के सदस्यों की 50वीं वार्षिक आमसभा की बैठक के दौरान इस उत्पाद को दुनिया के सामने पेश किया.
इसकी पहली खेप को गुजरात के कलोल से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. इफको के उपाध्यक्ष दिलीप संघाणी ने कहा कि “इफको नैनो यूरिया 21वीं सदी का उत्पाद है. आज के समय की जरूरत है कि हम पर्यावरण, मृदा, वायु और जल को स्वच्छ और सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करें.नैनो यूरिया की खासियतयूरिया की जरूरत 50 फीसदी तक कम करेगा. पर्यावरण अनुकूल उत्पाद है.
मिट्टी, हवा और पानी के प्रदूषण को रोकने में सहायक है. नैनो यूरिया में नाइट्रोजन के नैनो आकार के कण होते हैं. इन कणों का औसत भौतिक आकार 20-50 नैनोमीटर की सीमा में है.पत्तियों पर छिड़काव के बाद नैनो यूरिया के कण स्टोमेटा एवं अन्य संरचनाओं के माध्यम से आसानी से पत्तियों में प्रवेश कर कोशिकाओं द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं. ये कण बड़ी आसानी से पौधे की आवश्यकतानुसार अन्य भागों में वितरित हो जाते हैं. पौधे के उपयोग के बाद बची हुई नाइट्रोजन रिक्तिकाओं (Vacuole) में जमा हो जाती है और आवश्यकतानुसार पौधौं को उपलब्ध होती रहती है.
कहां बनन रहा है नैनो यूरिया




