
हरीश यादव पिथौरा – बलौदाबाजार वन मंडल के अंतर्गत देवपुर वन परिक्षेत्र एक बार फिर सुर्खियो मे है। इलाके में बेशकीमती सौगान लकडी की कटाई लोग दिन दहाडे करते है और लोग बेशकीमती सागौन की लकड़ी को जलाऊ लकड़ी बता लोग खुले आम ले जाते नजर आते है।
आपको बता दें कि इलाके के वन अधिकारी अपने कार्य क्षेत्र से नदारत रहते हैं और तो और अधिकारी कर्मचारी जंगलों की दौरा, गस्त तक नही करते है। इलाके में राजा देवरी, अमरवा, डुमर पाली ,चाँदन के ग्रामीण दीन दहाडे पेड़ो कि कटाई कर ले जाते नजर आते है।

आपको बता दें बारिश आंधी तूफान से जहा हजारों पेड़ गिरने की वन विभाग के अधिकारी बता रहे थे। पर मौका मुआयना करें तो लगभग र करीब 7000 पेड़ उखड़ कर गिरे थे। देवपुर वन परीक्षेत्र में मार्च महीने में 7000 पेड़ का गिरना अपने आप में रहस्य बना हुआ है जबकि मौके पर कुछ और दिखाई देता है। देखने वाली बात यह है की संबंधित विभाग के पास आज तक सही आंकड़ा भी नहीं है कि पेड़ कैसे गिरे? क्या रखरखाव में कुछ कमी थी या फिर और कुछ?

दबी जुबान से ग्रामीण बताते हैं कि आधा से ज्यादा मात्रा में सौगोन लकड़ी वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी बेच चुके हैं मामले में गहन जांच की आवश्यकता है कि आखिरकार ऐसे बेशकीमती सागौन जंगलों में तूफान से गिरना कैसे संभव है। पूरा मामला वन परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

मामले में बलौदाबाजार वनमंडलाधिकारी ने कहा कि -अभी एक माह ही हुए हैं मुझे यहा पदस्थ हुए , हजारों लकड़ियों की आंधी तुफान में गिरने की जानकारी थी , पर कितने पेड गिरे नही बता सकता। उन्होंने कहा कि अभिलेख देख कर जानकारी बताऊगा, रही बात किमती इमारती लकड़ियों के संबंध मे आपके सुचना के बाद पता चला है ,उस क्षेत्र के वन कर्मी अक्सर नदारत रहते है जांच पड़ताल कार्रवाही किया जाएगा।



