
राजिम। महाप्रभु जगन्नाथ इन दिनों बीमार चल रहे हैं, जिसके कारण गर्भगृह से बाहर महामंडप में काढ़ा पीकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। पुजारी रामसेवक दास वैष्णव ने बताया कि नवमीं तिथि को भगवान महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा को आसन से उतारा गया। गंगाजल से सर्वस्नान कराया गया। प्रतिदिन इन्हें काढ़ा पिलाया जा रहा है। सुबह 7 बजे बालभोग के साथ आरती के पश्चात लाई एवं काढ़ा का भोग लगाया जा रहा है। 10 जुलाई तक इसी तरह से देखरेख की जाएगी। 11 जुलाई को नेत्रोत्सव मनाया जाएगा। इसमें नए वस्त्रों के साथ श्रंगारिक होगा पश्चात गर्भगृह में स्थान ग्रहण करेंगे।
गजामूंग, राई जाम, केला, आम के साथी ऋतु फल देंगे। 12 जुलाई शुक्ल पक्ष द्वितीय तिथि दिन सोमवार को यात्रा के लिए भगवान तैयार होंगे। परंतु इस बार कोरोना गाइडलाइन को देखते हुए रथयात्रा नगर भ्रमण के लिए नहीं निकलेगी।राजीवलोचन मंदिर ट्रस्ट के मैनेजर पुरुषोत्तम मिश्रा ने बताया कि करोना के प्रभाव को देखते हुए राजीवलोचन मंदिर ट्रस्ट समिति एवं पुजारी समिति के संयुक्त निर्णय के अनुसार महाप्रभु जगन्नाथ नगर भ्रमण के लिए इस नहीं जाएगी। केवल मंदिर परिसर से ही भक्तों के सुख दुख के सहभागी बनेंगे।
उल्लेखनीय है कि धर्मनगरी राजिम में देवी देवताओं की अनेक प्राचीन मंदिर है उनमें से भगवान जगन्नाथ की मंदिर राजीवलोचन मंदिर परिसर के पूर्व दिशा में प्रस्थापित है। मंदिर चतुर्थाकार है तथा वास्तुशिल्प की दृष्टि से उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। महामंडप की ललाट अत्यंत आकर्षक है। आठ खंभों में मंडप टिका हुआ है। गर्भ गृह में भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्र की काष्ठ मूर्तियां विराजमान है। करीब तीन फीट ऊंचाई लिए हुए संयुक्त तीनों मनमोहिनी मुद्रा में विराजमान है।




