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नारायण चंदेल – पत्रकार से नेता प्रतिपक्ष तक का सफर ऐसे किया तय |


नारायण चंदेल आज छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष चुन लिए गए। सियासत में आने से पहले नारायण नैला में बिलासपुर के अखबार के संवाददाता थे। उनके पिता हालाकि संघ से जुड़े थे, मगर सियासत में और सियासत में आने से पहले उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।

90 के दशक में मध्यप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ बीजेपी के पितृ पुरुष कहे जाने वाले लखीराम अग्रवाल के सानिध्य में आने के बाद उनका राजनीतिक आविर्भाव हुआ। 98 में तमाम नेताओं के दावों को नजरंदाज करते हुए लखीराम अग्रवाल ने चांपा विधानसभा से टिकिट दिलाई और वे जीत भी गए। नारायण झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस के भांजी दामाद भी हैं।

जांजगीर जिले के नैला के रहने वाले नारायण चंदेल चांपा विधानसभा से तीसरी बार विधायक हैं। पहली बार उन्हें मध्यप्रदेश के समय 98 में पार्टी की टिकिट मिली और जीते भी। लेकिन, उसके बाद वे उस मिथक के शिकार हो गए, जिसके लिए चांपा विधानसभा जाना जाता है। वहां कोई विधायक रिपीट नहीं होता।

एक बार चंदेल जीतते हैं तो एक बार मोतीलाल देवांगन। सो, 2003 के चुनाव में चंदेल हार गए। 2008 में जीते तो 2013 में हार गए। फिर 2018 में भाजपा विरोधी लहर में भी चांपा का मिथक टूटा नहीं। कांग्रेस के देवांगन हारे और चंदेल जीत गए। वे विधानसभा में डिप्टी स्पीकर भी रह चुके हैं। वे उत्कृष्ट विधायक के रूप में भी सम्मानित हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा आयोग के वे अध्यक्ष भी वे रह चुके हैं।





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