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छत्तीसगढ़: प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना पिछले एक साल से पड़ी बंद, केंद्र सरकार ने मांगा हिसाब, शुरु हुई 42 करोड़ के स्माॅग टाॅवर लगाने की जुगत

राजधानी में प्रदूषण रोकने के लिए स्मॉग टावर लगाने की योजना पिछले एक साल से बंद पड़ी है। केंद्र सरकार ने बीते साल प्रदेश के तीन शहरों रायपुर, भिलाई और कोरबा में हवा साफ करने के लिए 120 करोड़ रुपए जारी किए थे। लेकिन तीनों ही शहरों में इसके जरूरी प्रयास नहीं हुए। हाल में केंद्र से निर्देश आए हैं कि जब तक इन 120 करोड़ रुपए के तीनों शहरों पर खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं मिल जाता, आगे का फंड जारी नहीं किया जाएगा।इस निर्देश से पूरा अमला हरकत में आ गया है। आनन-फानन में रायपुर और बिरगांव में 42 करोड़ रुपए के स्माॅट टावर लगाने का प्रोजेक्ट घोषित हुआ है, ताकि काम खत्म कर केंद्र को उपयोगिता प्रमाणपत्र जल्दी भेजा जा सके और आगे का फंड मिले। दरअसल, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और 15वें वित्त आयोग के तहत केंद्र सरकार ने 2020-21 के लिए 120.06 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था।यह राशि तीनों शहरों में पॉल्यूशन कंट्रोल मैकेनिज्म को मजबूत करने के लिए तय मानक के अनुसार सतत एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए दी गई थी। इस राशि का इन शहरों में कैसे उपयोग किया गया, इसकी जानकारी के लिए केंद्र ने राज्य सरकार से उपयोगिता प्रमाणपत्र मांगा है। उपयोगिता प्रमाणपत्र देने के बाद ही 2021-22 के लिए राशि दी जाएगी।

क्लीन एयर प्रोग्राम का फंड

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने देश के 132 शहरों में वायु की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत प्रदेश में तीन शहरों रायपुर, भिलाई-दुर्ग और कोरबा को भी शामिल किया गया है। इन शहरों के लिए ही केंद्र सरकार से राज्य को 120.06 करोड़ रुपए मिले थे। इसमें से एनसीएपी के तहत रायपुर, भिलाई- दुर्ग को 6-6 करोड़ और कोरबा को 1.06 करोड़ रुपए (कुल 13.06 करोड़) दिया गया। यही नहीं, 15वें वित्त आयोग की तरफ से इन शहरों को क्रमश: 55 करोड़ और 52 करोड़ (कुल 107 करोड़ रुपए) दिए गए।रायपुर-बीरगांव में लगेंगे टॉवरहवा में धूल के कणों को रोककर वायु प्रदूषण नियंत्रित करने रायपुर और साथ लगे बीरगांव में स्मॉग टॉवर लगाने की योजना अब जारी की गई है। इसके लिए करीब 84 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे।

रायपुर को दो किश्तों में 42 करोड़ दिए जा चुके हैं। इस रकम को केवल पर्यावरण शुद्धिकरण पर ही खर्च करना होगा। इसके लिए प्रमुख चौक चौराहों में उड़ने वाली धूल का दबाव कम करने मिस्ट फाउंटेन लगाए जाने हैं। यही नहीं, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत सड़कों की मरम्मत की कार्ययोजना बनेगी। इसके बाद जोन स्तर पर खुले में कचरा जलाने पर रोक भी लगेगी।

एक्शन प्लान के यह चार आधारपॉल्यूशन कंट्रोल करने एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन लगानावायु प्रदूषण के कारकों के स्रोत के अनुसार एनालिसिस करनासॉलिड और प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के प्रावधान लागू करनापीएम 10 की सघनता को घटाकर पीएम 2.5 के स्तर पर लानासभी जिलों के लिए अलग-अलग एनवायरमेंट प्लान बनाने पर कामवायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए शहरों में होने वाले काम की मॉनिटरिंग के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति करेगी।

इधर, राज्य के सभी जिलों के लिए अब अलग-अलग एनवायरमेंट प्लान बनाने पर काम हो रहा है। प्लान में सभी शहर, कस्बे और गांव को कवर करने पर विचार चल रहा है। 31 अक्टूबर से पहले जिलों का प्लान जिले की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।नगरीय प्रशासन विभाग ने एनवायरमेंट प्लान बनाने में सहयोग करने के लिए प्रदेश के सभी निकायों को पत्र लिखा है। बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पर्यावरण संरक्षण मंडल के माध्यम से सभी जिलों के लिए अलग- अलग एनवायरमेंट प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है

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