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सावन सोमवार के पहले दिन मंदिर के खुले पट, उमड़ी भक्तो की भीड़, देखिये खूबसूरत मंदिर का दृश्य…

बरगढ़, 26 जुलाई। आज हम आपको रायगढ़ जिले के एक ऐसे पवित्र स्थान के विषय में बताने जा रहे हैं जिसके चर्चा जिले के अलावा प्रदेश स्तर तक होती है। खरसिया विधानसभा के अंतर्गत खरसिया शक्ति मार्ग पर बरगढ़ ग्राम में स्थित सिद्धेश्वर नाथ धाम मंदिर को कौन नहीं जानता है। रायगढ़ से बरगढ़ महज 45 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यहां पर प्रसिद्ध सिद्धेश्वर नाथ की शिव मंदिर बहुत प्राचीन काल से प्राकृतिक दृश्य से लबालब यह मंदिर मन को शांति देने वाला है इस मंदिर में विराजमान भोलेनाथ की सत्यता की कथा हर कोई जाता है। आज 2021 के श्रावण मास का पहला सोमवार है। सभी जानते है कि श्रावण के महीने में भगवान शिवजी की पूजा अर्चना करते है। लोग अपनी-अपनी मनोकामना रख पूजा पाठ करते है। श्रावण मास में शिवजी को जल समर्पित करते हैं। बेलपत्र, दूध, पुष्प, फल, मिष्ठान पकवान चढ़ाते है और अपनी मनोकामना पूर्ण की दुआएं मांगते है। आइए आज हम आपको बरगढ़ के सिद्धेश्वरनाथ का दर्शन कराते हैं।

सिद्धेश्वर नाथ शिवलिंग

बरगढ़ में स्थित सिद्धेश्वर नाथ की मंदिर की महत्ता दूर – दूर तक फैली हुई है। आज सावन का पहला सोमवार है। कोरोना के प्रकोप का ध्यान में रखते हुए यहां गाइडलाइन का पालन करते हुए भक्तगण भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने में लगे हुए हैं। सिद्धेश्वार नाथ मंदिर में सैकड़ों की संख्या में कांवडिय़ों ने कांवड़ में जल लाकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। लोगों ने शिवालयों में विशेष पूजा अर्चना एवं जलाभिषेक किया।

जैसे ही सावन या महाशिवरात्रि आती है वैसे ही लोगों के मन मे एक उर्जापुर्ण उत्साह देखने को मिलता है। बरगढ़ के सिद्धेश्वर नाथ जिसे खरसिया क्षेत्र के अलावा दूर दूर तक बड़े ही श्रद्धा भक्ति के साथ जाना वफा जाना जाता है बरगढ़ के सिद्धेश्वर नाथ के नाम से लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए आते है। श्रावण मास के चारों सोमवार को यहां भक्तों की भीड़ रहती है। महाशिवरात्रि हो या सावन का महीना बाबा भोले नाथ के मंदिर में हमेशा भक्त अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए आते हैं।

मान्यता है सिद्धेश्वर नाथ मंदिर बरगढ़ में सबकी पूरी होती है मनोकामना

बरगढ़ के सिद्धेश्वर नाथ धाम के प्रांगण में कई मंदिर है। यहाँ प्रसिद्ध मंदिर भगवान शिवजी की जिसके दर्शन के लिए खरसिया परिक्षेत्र के बड़े बड़े नेता, कारोबारी सभी आके माथा टेकते है। अपनी-अपनी मनोकामना संकल्प लेकर आते है मिन्नतें करते है, और हमारे शिव भोले इतने दयालु है जो इनके चरणों मे आते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं। यहाँ के निवासियों का कहना है कि बाबा के चरणों में एक सुकून की अनुभूति होती है। यह के लिए कुछ करे वो कम है यह दूर-दूर से भक्त आते है पूजा अर्चना करते है।

हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज रहा शिवालय

हर-हर महादेव के जयकारे से गूंज रहा शिवालय

शिवजी की भक्त में रायगढ़, खरसिया, सक्ति के अलावा दूर-दूर के लोग पैदल यात्रा कर कावंड़ में पानी भर कर यहाँ आते है। श्रावण महीने के आते ही यहां सब तरफ बाबा भोलनाथ की भक्ति का माहौल है। बाबा को जल चढ़ाने के लिए कांवडिय़ों का जत्था देखा जा सकता है। भक्तगण बोल-बम का नारा लगाते हुए शिवजी का जलाभिषेक करते हैं। आज सावन महीने का पहला सोमवार है आज यहाँ भक्तो कावंड़ियों की भीड़ लगी हुई है। पहले ही सोमवार से यहाँ भीड़ लगना चालू हो जाता है। सावन सोमवार के दिन भक्तों की लाइन होती है वो कोई कम नहीं होती है। सोमवार के दिन सुबह से ही लोग आने शुरू कर देते है। सोमवार के रात्रि 2 बजे मंदिर के कपाट खुलते है। जैसे ही कपाट खुलते है वैसे ही भक्त दर्शन के लिए आगे एक-एक करके दर्शन करते है। दिनभर भक्तों ने भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। श्री फल, बेलपत्र, चावल, अगरबत्ती, धूप दीप लिए भक्तों की कतार शिवालयों में लगी हुई है।महिलाओं सहित युवतियों ने भी भगवान भोलेनाथ की आराधना हेतु व्रत रखा। पूरे शिवालय में हर हर महादेव के जयकारे लगते रहे शंखों की ध्वनि एवं मंदिरों के घंटे से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो रहा है।

प्राकृतिक दृश्य लोगों को स्वत: ही करता है आकर्षित

आप कभी बरगढ़ सिद्धेश्वर नाथ का दर्शन करने जरूर जाए। यहां का प्राकृतिक वातावरण अत्यंत मनोरम व शांत है। तीन तरफ से पहाड़ों की सुंदरता, मंदिर के किनारे बहती हुई बोराई नदी (नाला) यहां के दृश्य को भी विहंगम व सुंदर बनाती। यहां का दृश्य लोगों को स्वत: ही भोलेनाथ के प्रति आकर्षित करती है। पहाड़ों के बीच से निकलने वाली बोराई नदी बहती हुई मंदिर के सुंदरता पर चार चांद लगा देती है तो वहीं पहाड़ों से घिरा हुआ यह मंदिर मन को आनंदित करती है। सक्ति की ओर जाने वाली पलगड़ा घाटी पर भक्तगण घूमने फिरने के लिए भी जाते हैं और प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाते हैं। बरसात आते ही बरगढ़ खोला स्थित बुराई नदी अपने पूरे शबाब पर होती है। दो पहाड़ों के बीच से निकलते हुए नदी स्वरूप नाला भगवान भोलेनाथ के चरणों को छूती हुई मदमस्त होकर इठलाती हुई बह रही है।

बोराई नाला कि कल कल करती मधुर ध्वनि दिल को सुकून देती है तो वहीं सुंदर हर – भरे पेड़ -पौधों से आच्छादित पहाड़ के दृश्य के बीच स्थित एवं सिद्धेश्वर नाथ का मंदिर अत्यंत ही आनंदित करते हुए लोगों को स्वत: ही अपनी ओर खींचता है। सावन के महीने में यहां का जो प्राकृतिक दृश्य होता है उसके सुंदरता और नदी की बहती हुई ध्वनी, स्वच्छ शीतल हवा के साथ भक्ति का वातावरण मनुष्य को एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां अद्भुत शांति का अहसास होता है।

मंदिर प्रांगण में भगवान शिव जी के साथ साथ मां आदिशक्ति देवी दुर्गा, भगवान श्री राम, भैया लक्ष्मण, सीता मैया, समेत भगवान साईं नाथ महाराज का भी मंदिर सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित है। यह मन्दिर मान्यताओं से परिपूर्ण है।बताया जाता है कि भगवान सिद्धेश्वर नाथ यहां आए अपने हर भक्तों को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। बरगढ़ खोला आप सभी को एक बार जरूर आना चाहिए।

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