31 July 2020 – जानिए आज का इतिहास
आज के दिन ऐसी बहुत सी घटनाएं घाटी थी जिन्हे जानना सभी के लिए महत्पूर्ण है। आज की तारीख में घटी बहुत सी घटनाएं इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गईं. जानिए आज का इतिहास
आज यानी 31 जुलाई की कुछ ऐतिहासिक घटनाओं पर नजर डालें तो पता चलता है कि सन 1880 में भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार व लेखक प्रेमचंद का जन्म हुआ, वहीं, सन 1940 में ब्रिटेन ने भारत के महान क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी ऊधम सिंह को फांसी पर लटका दिया.
इसके अलावा आज ही के दिन प्रसिद्ध पार्श्व गायक मोहम्मद रफी का निधन हुआ. वहीं, सन 1992 में सितार वादक पंडित रविशंकर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
तो चलिए, भारतीय इतिहास में 31 जुलाई की ऐतिहासिक घटनाओं पर एक नजर डाल लेते हैं –
गरीबी, शोषण और उत्पीड़न की जीवन अवस्था में भी भारतीय साहित्य को उत्कृष्ट रचनाएं देने वाले मुंशी प्रेमचंद का जन्म आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1880 को बनारस के पास समही गांव में हुआ था.
वैसे तो इनका नाम धनपतराय श्रीवास्तव था, लेकिन अंग्रेजों की नजरों से बचने के लिए इन्होंने अपने साहित्य पर नाम बदलकर प्रेमचन्द कर लिया था.
इनका शुरूआती जीवन उस तंग और खस्ताहालात में बीता कि इन्हें घर खर्च चलाने के लिए अपना कोट और यहां तक कि किताबें भी बेचनी पड़ीं.
बहरहाल, ये इन उन्मादों से कभी दुखी नहीं हुए और साहित्य की ओर झुकाव बना रहा.
इन्हें बचपन से ही उर्दू की तालीम दी गई थी, सो इन्होंने उर्दू के तमाम उपन्यास पढ़े.
इसके बाद इनके ऊपर लिखने का ऐसा जुनून सवार हुआ कि इन्होंने 13 साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया. और तब तक लिखा जब तक प्राण शरीर को छोड़ कर नहीं चले गए.
प्रेमचंद ने पहली रचना मामू के एक विशेष प्रसंग पर लिखी. और इस तरह से अपनी छोटी सी उम्र में ही प्रेमचंद साहित्यकारों की पंक्ति में खड़े हो गए.
इसके बाद इन्होंने कई कहानियां, नाटक, उपन्यास लिख डाले. लेकिन इनकी ख्याति सन 1931 में प्रकाशित उपन्यास ‘गोदान’ से दूर-दूर तक फैल गई.
‘गोदान’ प्रेमचंद का सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास है, जिसमें इन्होंने ग्रामीण परिवेश और शहरी समाज व उनकी समस्याओं का बारीक चित्रण प्रस्तुत किया है.
‘गोदान’ के अलावा इन्होंने ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘सेवा सदन’ जैसी एक से एक उत्तम कृतियां भारतीय साहित्य को समर्पित की हैं. उनकी रचनाओं को भारत की प्रमुख भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है.
हिंदी साहित्य के सबसे अधिक लोकप्रिय साहित्यकार, उपन्यासकार प्रेमचंद अपने समय के उम्दा लेखकों में नायाब हीरा थे.
पं. रविशंकर को मिला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार
भारत के सुप्रसिद्ध सितार बादक पंडित रविशंकर को आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1992 को एशिया का नोबेल कहे जाने वाला रेमन मैग्सेसे पुरस्कार प्रदान किया गया.
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की शुरूआत असल में फिलीपींस के राष्ट्रपति रेमन मैग्सेसे की याद में रेरमन मैग्सेसे फाउंडेशन द्वारा की गई थीं. ये पुरस्कार सन 1957 से ऐसे एशियाई लोगों व संस्थाओं को दिया जा रहा है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो.
पं रविशंकर का पूरा नाम पंडित रवींद्र शंकर चौधरी था. इन्होंने अपनी सितार वादन कला से विश्व में भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक अलग पहचान दिलाई.
पं रविशंकर ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की कला का मिलाप पश्चिम के संगीत से कराया था. शायद यही कारण था कि 1960 के दशक के इंग्लैंड के बहुचर्चित बैंड बीटल्स ने पंडित रविशंकर को ‘गॉडफादर ऑफ वर्ल्ड म्यूजिक’ तक कह दिया था.
पं रविशंकर का बचपना सुखद रहा. गरीबी नहीं थी, इनका परिवार पढ़ा लिखा और संपन्न था. पिता ऊंचे पद पर कार्यरत एक बैरिस्टर थे.
रविशंकर 10 साल के रहे होंगे, जब उन्हें संगीत से प्रेम हो गया. वह एक डांसर बनना चाहते थे, लेकिन समय को ये मंजूर नहीं था.
वैसे तो इन्होंने अपने बड़े भाई उदय शंकर के साथ नृत्य सीखना और ऐसे कार्यक्रमों में आना जाना शुरू कर दिया था, लेकिन ये ज्यादा दिनों तक नहीं चला.
इन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन ख़ां को अपना गुरु बनाया और संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी.
लगभग 18 साल की उम्र में इन्होंने डांस छोड़ सितार को ही अपना करियर बना लिया. और लगभग 92 साल की उम्र तक सितार वादन किया.
अंग्रेजों ने क्रांतिकारी ऊधम सिंह को फांसी दी
आज ही के दिन यानी 31 जुलाई 1940 को पंजाब में जन्मे क्रांतिकारी ऊधम सिंह को अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया था.
इससे पहले 13 मार्च 1940 को ऊधम सिंह ने अमृतसर में जलियांवाला बाग में मारे गए निहत्थे और निर्दोष भारतीय लोगों की मौत का बदला लेने के लिए माइकल ओ डायर को ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया था.
गुलाम भारत में 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में कर्नल रेगिनाल्ड डायर ने जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था. उस दौर में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर रहते हुए माइकल ओ डायर ने जलियांवाला बाग घटना का समर्थन किया. इस घअना ने ऊधम सिंह को आग बबूला कर दिया, और वो बदले की भावना के साथ ओ डायर को मारने निकल पड़े.
माना जाता है कि ऊधम सिंह ने डायर को मारने की कसम खाई थी, जिसके लिए उन्होंने करीब 21 साल तक इंतज़ार किया. और वो इस अंग्रेज की खोज करते-करते इंग्लैंड तक पहुंच गए, वहीं सही मौका मिलते ही उसकी हत्या कर दी.
लंदन में केंद्रीय एशियाई सोसाइटी और ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की एक बैठक चल रही थी, जहां ऊधम सिंह भी पहुंचे थे. यहां एक किताब के अंदर छिपा कर लाई गई रिवॉल्वर से ऊधम सिंह ने माइकल ओ डायर को अपना निशाना बनाया.
अगर ऊधम सिंह चाहते तो वह भीड़ भरी उस सभा से भाग भी सकते थे, लेकिन उन्होंने वहां से भागने की कोई कोशिश भी नहीं की और अपनी गिरफ्तारी दे दी और फिर मामले में एक दिखावटी कानूनी कार्रवाई के बाद इन्हें लंदन में फांसी दे दी गई.
सन 1658 ई. में आज ही के दिन यानी 31 जुलाई को मुगल शासक औरंगजेब ने अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुजफ्फर औरंगज़ेब बहादुर आलमगीर की उपाधि के साथ अपना राज्याभिषेक कराया.
3 नवंबर 1618 को दोहन में पैदा हुआ औरंगजेब मुगल बादशाह शाहजहां की औलाद था. इसका दादा अकबर जितना उदार हृदय माना जाता था, औरंगजेब उससे लाख कट्टर था.
मुस्लिम धर्म के प्रचार प्रसार के लिए जो भी क्रूरता ये कर सकता था, की और अन्य धर्मों के तीज त्यौहारों पर रोक लगा दी और उनके धर्म गुरुओं को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए बाध्य किया. तक तक जब तक कि वो शहीद न हो गए, उन्हें प्रताड़ित किया गया.
बहरहाल, पिता के बीतार होने के बाद चारों लड़कों में उत्तराधिकार की लड़ाई छिड़ गई, जिसमें खूनी संघर्ष के बाद औरंगजेब विजयी रहा और उसने अपना राज्याभिषेक दिल्ली में करा लिया.
उसने मुगल साम्राज्य पर अपना अधिकार जमाने के लिए अपने भाईयों की हत्या की. और फिर आगरा के किले पर कब्जा कर लिया, जहां इसने सबसे पहले अपने बाप को कैद किया और खुद गद्दी पर बैठ गया.
1998 – सार्क का दसवां शिखर सम्मेलन श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो में सम्पन्न।
2003 – इस्रायल और फ़िलिस्तीन के सुरक्षा मंत्रियों की बैठक येरूशलम में समाप्त।
2004 – आर्थिक सहयोग मंच बिम्सटेक का नाम बदलकर ‘बंगतक्षेस’ किया गया।
2005 – उज़बेकिस्तान ने अमेरिका को अपने सैनिक अड्डे हटा लेने का आदेश दिया।
2006 – श्रीलंका में युद्ध विराम समझौता समाप्त, एलटीटीई के साथ संघर्ष में 50 लोग मारे गये।
2007 – भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर सुधीर पारिख को पाल हैरिस अवार्ड प्रदान किया गया।
2008 – थाइलैंड की एक अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री थॉक्सिन शिनावात्रा की पत्नि को कर चोरी के मामले में दोषी पाये जाने पर तीन वर्ष की सज़ा सुनाई।
2012- प्रो. अशोक सेन को पहले यूरी मिलनर फंडामेंटल फिजिक्स प्राइज़ (मौलिक भौतिकी पुरस्कार) के नौ विजेताओं में से एक विजेता घोषित किया गया।



