
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने आज एक बयान जारी करते हुए कहा है कि भाजपा और डा. रमन सिंह की फितरत दरअसल लाशों पर राजनीति करना है। इसीलिये इन्होंने अभी तक अनर्गल आरोप लगाना बंद नहीं किया है। क्या डा. रमन सिंह प्रदेश की जनता को यह बताना चाहेंगे कि उनके शासनकाल में पंडो जनजाति के लिये उन्होंने क्या किया? अगर 15 वर्षों में भी पंडो जनजाति की स्थिति में रत्ती भर भी सुधार नहीं हुआ है तो क्या इसके लिए रमन सिंह खुद जिम्मेदार नहीं है? क्या कारण था कि सूरजपुर के पंडोनगर के लोगों को विधानसभा चुनाव 2018 का बहिष्कार करने की घोषणा करनी पड़ी थी?
भाजपा ने सन 2017 में तब जांच टीम क्यों नहीं भेजी जब सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र में थोड़े से अंतराल में ही पंडो समाज के करीब 30 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इस घटना पर केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम को जांच करने के लिये आना पड़ा था। उस समय डा. रमन सिंह की जुबान पर ताला क्यों लग गया था? 2016 में वाड्रफनगर के बसंतपुर में रामकरण पंडो की मृत्यु को लेकर क्यों पूरे पंडो समाज को उग्र आंदोलन करने पर विवश होना पड़ा था, क्या डा. रमन सिंह इस पर कुछ प्रकाश डालना चाहेंगे?
क्या कारण है कि पंडो समाज से भाजपा अपने शासन के 15 वर्षों में अंधविश्वास और अशिक्षा को दूर नहीं कर पायी, क्या कारण है कि पंडो समाज की मातायें बहनें वर्षों से कुपोषण का शिकार रहीं जिसके कारण एक बड़ी आबादी हिमोग्लोबिन की कमी से जूझती रही। इन प्रश्नों में से किसी का भी उत्तर डा. रमन सिंह के पास नहीं होगा लेकिन एक काम वे बखूबी करना जानते हैं, और वो है ऐसे संवेदनशील विषय पर ओछी राजनीति करना।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि बलरामपुर में पंडो समाज के लोगों की मृत्यु की घटना की जांच के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव को दिये जा चुके हैं जिन्हें तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
पंडो जनजाति में हिमोग्लोबिन की कमी के मद्देनज़र सभी आवश्यक दवायें सप्लाई करने के निर्देश दिये जा चुके हैं। भाजपा शौक से अपनी जांच समिति गठित करके भेज सकती है, वैसे भाजपा को ये जांच समिति अपनी सरकार के समय गठित करनी थी और उनकी सुध लेनी चाहिये थी। अब वहाँ जाकर घड़ियाली आंसू बहाना सिर्फ और सिर्फ भाजपा की गिरी हुई राजनीति के सिवा और कुछ नहीं है।
कांग्रेस सरकार न सिर्फ पंडो बल्कि सभी जनजातीय समाजों के लिये पूरी गंभीरता से काम कर रही है। पंडो विकास अभिकरण के लिये बजट की कहीं कोई कमी नहीं रखी गई है। सरकार ने मुख्यमंत्री सुपोषण योजना के तहत कुपोषण के विरूद्ध एक निर्णायक जंग छेड़ी हुई है जिससे सभी लाभान्वित हो रहे हैं। मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं और दाई दीदी क्लीनिकों के माध्यम से माताओं और बहनों को निरंतर स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। जो भी स्थानीय बाधायें रहीं या कमियां छूट गईं वे जांच में सामने आने पर उन पर सरकार कार्यवाही सुनिश्चित करेगी।




