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आलेख – हर जगह जातीवाद संप्रदाय वाद दिख रहा….कारण तंग दिल सोच – डॉ. चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

इस देश मे अगर सबसे बड़ी किसी चीज की कमी है तो एक भारतीय नजरिये की । आज हर जगह जातीय वाद सांप्रदाय वाद जो दिख रहा है उसका मुख्य कारण एक तंग दिल सोच जिम्मेदार है । हर आदमी बात तो ऐसी करेगा कि उसका इससे दूर दूर तक रिश्ता नही है । पर वो अंदर ही अंदर इसका पोषक रहता है । यही कारण है देश पता नही कितने मे बटा है ? यहा की पूरी राजनीति इसी पर आधारित है । खुलकर सब अपना कार्ड खेल रहे है । देश से किसी को मतलब नही है । यही कारण है जो अंग्रेज करके चले गए यहा के नेता उसी पदचिन्हो मे चल रहे है । क्योंकि ये राजनीति उनको शूट कर रही है । इन नेताओ ने इसका जहर इतना घोल दिया है कि इसका शिकार भी ये लोग हो रहे है । इसलिए चुनाव मे इसी तंग नजरियो को ध्यान मे रखकर ही पूरा चुनाव लडा जाता है । अगर कोई अल्पसंख्यक है तो ता जिंदगी उसी लेबल मे रहना चाहेगा । इसलिए बड़े पद मे आने के बाद यह पहचान खोना नही चाहते । यही कारण है एक अल्पसंख्यक उपराष्ट्रपति को जब दूसरे बार मौका नही मिला तो खुलकर सांप्रदायिकता का कार्ड खेल दिया । वैसे एक पूर्व राष्ट्रपति को पुनः मौके के लिए अपना दलित कार्ड निकाल दिया । किसी ने भी यह नही कहा मै हिंदुस्तानी हू मुझे उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति बनाओ । फिर हम किस धर्मनिरपेक्षता के माहौल मे रह रहे है ? आज तक मेरी विधानसभा ही जातिवाद से उबर नही पाई है । इस चुनाव के समय भी हल्ला हुआ क्या हुआ ? किसी दल मे यह हिम्मत नही की चक्रव्यूह से मुक्ति पाकर भले एक सीट खो ले । सबको उसी माहौल की राजनीति करना है । फिर किसको दोष दे । पर एक सामान्य नागरिक भले यह कोशिश कर ले की सांप्रदायिक माहौल या ताना-बाना अच्छा रहे पर ये दल अपने सियासी फायदे के लिए उसमे सुराग कर देगा । यही कारण है ये तथाकथित सेक्यूलर लोग ज्यादा तनाव पैदा करते है । अभी उनचास लोगो ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी खुद ही सांप्रदायिकता के खिलाफ निकलते और माॅबलींचिंग के खिलाफ मोर्चा खोलते । पर ऐसा करने से जगह नही मिलेगी । चर्चा नही होगी । करो देश को बदनाम । वही दुर्भाग्य आम आदमीयो का है नागरिको का है जो इनके बहकावे मे आ जाते है । कोई धर्म न कोई व्यक्ति किसी के खिलाफ है । पर ऐसा माहौल बनाया जाता है । सभी एक-दूसरे के भाई है रहना सबको इस देश मे है । फिर क्यो हम लोगो के बीच राजनीति अपनी जगह बना लेती है । जिस दिन हम लोगो के बीच से जवाब मिलेगा उस दिन ये लोग नियंत्रित हो जाऐंगे । कुल मिलाकर हमारी एक पहचान है वो हिंदुस्तानी है वही हमे आपस मे जोड़ने का काम करता है । जब प्रधानमंत्री कह रहे है  ” सबका साथ सबका विकास ” । तो फिर किसी विवाद की गुंजाइश नही रह जाती ।’ हम सब एक है ‘ यही हमारा मूलमंत्र है जो हमे बांधे रखता है । हमे हर  एक बात को भारतीय होने के नजरिए से देखना होगा । इससे हर समस्या अपने आप सुलझ जाऐगी ।
 डा.चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

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