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स्वच्छता मॉडल के लिए देश मे चर्चित अम्बिकापुर एक बार फिर गोबर खरीदी और खाद बनाने के लिए भी चर्चा मे, महिलाएं 12 क्विंटल बना चुकी है खाद

सोनुकेदार अम्बिकापुर – स्वच्छता के क्षेत्र मे खूब नाम कमा चुके अम्बिकापुर शहर अब गोबर से खाद निर्माण को लेकर भी काफी तेजी से आगे बढ रहा है… शहर के गोबर खरीदी केन्द्रो मे स्वच्छता दीदीयां रात दिन मेहनत करके गोबर से खाद बनाने के काम मे जुटी है। आलम ये है कि एक तऱफ जहां लोग लॉक डाउन मे अपने घरो मे कोरोना संक्रमण को हराने के लिए स्टे कर रहे हैं तो वही शहर की स्वच्छता दीदीयो ने इस लॉक डाउन काल मे हजारो क्विंटल खाद बनाकर तैयार कर लिया है.. जो अब बिकने के लिए तैयार है।

सरकार की गोधन न्याय योजना का सबसे बेहतर काम अम्बिकापुर मे चल रहा है शहर के चार गोबर खरीदी केन्द्रो मे पिछले एक महीने के लॉक डाउन मे स्वच्छता दीदीयो ने गोबर से करीब 12 क्विंटल खाद तैयार कर लिया है। अपने परिश्रम और लगन के साथ ही अपने परिवार की आय बढाने के लिए स्वच्छता दीदीयो ने गोबर से ना केवल 12 क्विंटल खाद तैयार कर लिया है बल्कि अपने उत्पाद को बेचने के लिए इन दीदीयो ने गोबर की छनाई और पैकिंग का काम भी शुरु कर दिया है जिसके बाद वो अपने उत्पाद को बाजार  मे तय कीमत मे बेच सकेगी जिसके लिए नगर निगम प्रबंधन उनका भरपूर सहयोग कर रहा है।

गोधन न्याय योजना के तहत अम्बिकापुर शहर मे जो चार सेंटर संचालित है… उसमे से शहर के गुठरापारा संग्रहण केन्द्र, बस स्टैंड स्थित गोबर खरीदी केन्द्र का आज निगम आयुक्त प्रभाकर पाण्डेय ने निरीक्षण किया और खाद बनाने से लेकर उसके पैकिंग करने तक स्वच्छता दीदीयो को क्या परेशानी आ रही है उसका जायजा लिया।

गौरतलब है कि बरसात के पहले लॉक डाउन अवधि मे जहां 123 क्विंटल गोबर से खाद बनाने की प्रकिया पूरी कर ली गई है.. तो वही गोबर की खदीदी और खाद बनाने के लिए बरसात मे आने वाली समस्याओ को देखते हुए निगम आयुक्त ने निगम के जिम्मेदार इंजीनियर की टीम को ये निर्देश दिए हैं… कि बरसात के पहले खरीदी और खाद बनाने वाले स्थान पर विधिवत सेड और अन्य जरूरतो को पूरा कर लिया जाए।

अपने स्वच्छता मॉडल के लिए देश मे चर्चित अम्बिकापुर एक बार अपने गोबर खरीदी और खाद बनाने के लिए भी चर्चा मे आ सकता है… अगर इसी गति से ये काम चलता रहे तो…. बहरहाल पिछले एक महीने के लॉक डाउन मे ही शहर के चार गोबर खरीदी केन्द्र मे कार्यरत स्वच्छता दीदीयो ने 12 क्विंटल खाद बनाकर सराहनीय काम किया है… बस जरूरत है तो इनके और ज्यादा प्रोत्साहन की… जिससे कि आने वाले समय मे अम्बिकापुर स्वच्छता मॉडल के साथ खाद निर्माण के मॉडल मे भी देश मे अव्वल आ सके।

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