
सोनुकेदार अम्बिकापुर- सरगुजा जिले मे तीसरे चरण का लॉक डाउन जारी है.. इस दौरान जिला प्रशासन ने नागरिक सुविधा को देखते हुए .. जिले वासियो को एक अतिरिक्त छूट दी है.. जिसके तहत जिले के सभी बैंक सुबह 10 से 2 बजे तक खुले रहेंगे… लेकिन इस आदेश के बाद बैंक मे उपभोक्ताओ की भीड इस कदर उमड रही है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा पाना मुश्किल हो गया है.. इतना ही नहीं जिले के सहकारी केन्द्रीय बैंक के रवैये को लेकर किसानो मे अच्छी खासी नाराजगी देखने को मिल रही है.. क्योकि इन किसानो को खेती बाडी और शादी विवाह समेत अन्य जरूरी काम के लिए मात्र 10-10 हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं।
किसानो की सुविधा से लिए संचालित सरगुजा का जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की अम्बिकापुर शाखा आम उपभोक्ताओ के लिए मुसीबत बन गया है.. प्रशासनिक फरमान के बाद 16 मई से लेन देन के लिए खुले बैंको मे लोग शादी विवाह खेती बाडी समेत अन्य जरूरी काम के लिए रूपया निकालने पहुंच रहे हैं.. लेकिन ये किसान विड्र्रवाल फार्म मे भले ही कितना रूपया भरकर निकालने के लिए बैंक प्रबंधन को दे रहे है.. लेकिन बैंक के लोग इनको केवल 10 हजार रूपए ही दे रहे हैं।
बैंक मे रूपया निकालने के लिए कल्याणपुर से आए बिहारी लाल ने बताया कि वो अदरक की बीज और खाद लेने के लिए रूपया निकालने के लिए आए थे.. लेकिन उनके खाते मे 72 हजार रूपए होने के बाद भी उनको महज 10 हजार रूपए दिया गया है.. इनके अलावा फतेहपुर गांव से अपने नाती की शादी के लिए रूपए निकालने आए किसान मोहन बताते है कि वो अपने खाते मे जमा 50 हजार रूपए निकालने आए थे.. लेकिन उन्हे मात्र 10 हजार रूपए दिया गया।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैक मे रूपए निकालने आए अधिकांश किसान और उपभोक्ता अपनी जरूरत के समय के लिए बैंक मे रूपया रखे थे.. लेकिन जब उनको जरूरत मे रूपया मे नहीं मिल रहा है . तो फिर वो सूदखोरो के से रूपया लेने के लिए मजबूर नजर आ रहे है।
इधर इस मसले को लेकर हमने बैंक प्रबंधन से बात की तो उनके मुताबिक सोशळ डिस्टेसिंग का पालन कराने के लिए बैंक के दो गार्ड व्यवस्था मे लगे है… लेकिन किसानो को उनका जमा रूपया ना मिलने के सवाल पर बैंक प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल जितना रूपया बैंक मे है उसको थोडा थोडा बांटा जा रहा है… इसके अलावा प्रबंधन की मांग पर जल्द ही 1 करोड रूपए आने वाला है. जिसके बाद ही लोगो की मांग अनुसार रूपए दिए जा सकेगें।
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक प्रबंधन किसानो को रूपए बांटने की बात ऐसे कर रहा है.. जैसे उसके द्ववारा किसानो को खैरात बांटा जा रहा है.. लेकिन असल हकीकत ये है कि किसान अपने हक का रूपया बैंक मे लेने तो पहुंच रहे हैं… लेकिन उनके जरूरी कामो के लिए बैंक प्रबंधन प्रत्येक किसाान महज 10 हजार रूपए देकर किसानो के साथ कुठाराघात कर रहा है… बहरहाल शादी विवाह और खेती किसानी के लिए बैंको मे रूपया जमा करने वाले किसान आज बैंक प्रबंधन के इस रवैये के कारण अपने आप को ठगा महशूश कर रहे है..




