WorldCup विशेष – क्रिकेट का खेल राजनीति और धर्म दोनो में झोंके जा रहे, कितना सही कितना गलत

डा .वाघ की वाल पर आज क्रिकेट पर ही बात कर ले । कल विश्व कप मे भारत ने कल पाकिस्तान को सात विकेट से हरा दिया । क्रिकेट खेल है सिर्फ खेल पता नही कब इसे धर्म बना दिया गया ! क्रिकेट के पीछे वह छुपा व्यापार है जिसने इस खेल को अपने नफा नुकसान के चलते धर्म का तो देश का चोला पहना दिया । क्रिकेट के यह खिलाडी भगवान है तो क्या किसी भी धर्म का भगवान अपने मानने वालो को जुऐं की लत लगाकर क्या उसे बर्बाद करेगा ? क्या किसी भी धर्म का भगवान अपने पैसा बनाने के लिये गुटखा खाने की लत लगाकर कैंसर की तरफ ढकेलेगा ? यह लोग मात्र एक सफल खिलाडी है इससे इंकार नही किया जा सकता इससे ज्यादा कुछ नही । खेल इनका व्यवसाय है जिसे यह लोग भी इसी रुप मे लेते है चाहे इसके पूर्व खिलाडी हो या वर्तमान । इन्हे इनके खेल के मुताबिक ही विज्ञापन व उसके कांट्रैक्ट मिलते है । इसलिए ही यह तथाकथित भगवान टायर आयल गुटखा जो इनके खाते मे विज्ञापन आ जाए गुरेज नही करते है । इन्हे शुद्ध रूप से पैसा कमाने से मतलब है । क्रिकेट मे वह खेल हारता है जीतता है यह हर खेल के उसूल होते है फिर कोई देश या राष्ट्र कैसे हो जाता है । दुर्भाग्य से इस खेल को जरूरत से ज्यादा महिमामंडित कर दिया गया है । खेल के जज्बात को देखते हुए यह धर्म कब बना दिया गया पता नही ? जब इन खिलाडियो को या दूसरे शब्द मे तथाकथित भगवान को मैच फिक्सिंग मे संलिप्त देखते है तो लोग-बाग आहत भी होते है । जिस क्रिकेट के बूते एक खिलाडी देश का प्रधानमंत्री तक बन गया आज वो तोषाखाने के मामले मे जेल मे है । वही हाल इस देश के एक क्रिकेटर खिलाडी का है जिसे अपने राजनीतिक कैरियर के कारण मुहावरा व कसीदे समय समय पर कहना पडा वही यू टर्न भी लेना पडा । यह भी इकलौता खिलाडी नही है और भी है । कुल मिलाकर जो अच्छा खेलता है वह जीतता है । सबको मालूम है इन भगवान खिलाडियो के उपर भी एक आका है जिसे बोर्ड कहा जाता है और चलती भी इन्ही की है । न इस खेल मे धर्म ढूंढो न राजनीति ? यही कारण है समर्पित शतक के लिए राजदूत ने भी तंज कस दिया । यही कारण है राजनीति जब घुस गई तब यह खेल भी उससे नही बच पाया । राजनीति की वह छाया ही है जिसके कारण भारत पाकिस्तान क्रिकेट मैच नही हो पा रहे है वही पाकिस्तान के खिलाडियो पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है । खेल है इसे भी दूसरे खेल की तरह लेना चाहिए।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




