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कोरोना का खौफ, बच्‍चे पैदा करने में हिचक रहे भारतीय

देशभर के कई अस्‍पतालों में प्रेग्‍नेंसी से जुड़े कंसल्‍टेशंस में 50% तक की कमी आई है। कोरोना के चलते कपल्‍स के बीच डर बैठा हुआ है। ईशा ने बताया की शादी पांच साल पहले हुई थी। उन्‍होंने इस साल मां बनने की सोची थी। 28 साल की ईशा ने अपने प्री-कंसेप्‍शन टेस्‍ट भी करा लिए थे लेकिन कोविड-19 के चलते बच्‍चों की किलकारी गूंजने में देरी हो रही है। ईशा निराश जरूर हैं मगर कहती हैं कि हालात देखते हुए वह बच्‍चे के लिए इंतजार करना पसंद करेंगी। उन्‍होंने कहा, “यह मेरा पहला बच्‍चा होगा इसलिए मैं तबतक बच्‍चा नहीं चाहती जबतक वैक्‍सीन नहीं आ जाती। यहां तक कि गायनकोलॉजिस्‍ट ने भी सलाह दी कि इंतजार कर लो।” फिलहाल ईशा का ध्‍यान अपने कारोबार और फिटनेस इम्‍प्रूव करने पर है।

अनुमान धरे के धरे रहे गए

कोरोना वायरस महामारी ने ग्रामीण इलाकों में गर्भपात और नियोजन के उपायों की पहुंच तहस-नहस कर दी है, साथ ही जोड़े अब गर्भधारण से पहले कई बार सोच रहे हैं। जब महामारी की शुरुआत हुई थी तो बहुतों ने कहा था कि बेबी बूम आएगा। लेकिन तनावपूर्ण माहौल के बीच ज्‍यादा सेक्‍स करने की हाइपोथीसिस पुरानी है। ताजा रिसर्च बताती है कि स्‍वास्‍थ्‍य और वित्‍तीय अस्थिरता का गर्भधारण जैसे फैसलों पर बड़ा असर होता है। ब्रुकिंग्‍स के एक लेख के अनुसार, 1918 में स्‍पैनिश फ्लू के बाद बर्थ रेट में 18% की गिरावट देखी गई थी। उसके अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगले साल तीन से पांच लाख तक कम बच्‍चे पैदा हो सकते हैं।

लान करके प्रेग्‍नेंट होने में आई कमी

भारतीय अस्‍पतालों से मिले शुरुआती डेटा के अनुसार, कपल्‍स बच्‍चा पैदा करने के प्‍लान को टाल रहे हैं। दिल्‍ली के सीताराम भारतीय अस्‍पताल में मैटर्निटी प्रोग्राम्‍स की कंसल्‍टेंट और हेड, डॉ रिंकू सेनगुप्‍ता के अनुसार, प्री-कंसेप्‍श्‍न कंसल्‍टेशन में 50% की कमी आई है। उन्‍होंने कहा, “लोग इस वक्‍त कंसीन करने से डर रहे हैं और प्री-कसेप्‍शन काउंसलिंग के लिए अस्‍पताल आना अवॉयड कर रहे हैं। कुछ डर के मारे प्रेग्‍नेंसी टर्मिनेट करना चाहते हैं और उनकी काउंसलिंग करनी पड़ी।”

शादियां टलने से भी घटीं प्रेग्‍नेंसी

बीएलके सुपर स्‍पेशियलिटी हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्‍टेंट डॉ तृप्ति शरण के अनुसार, प्‍लान्‍ड प्रेग्‍नेंसीज भले ही कम हुई हों, नए केसेज में अनप्‍लान्‍ड प्रेग्‍नेंसीज बढ़ी हैं। 2021 में पैदा होने वाले बच्‍चों की संख्‍या पर शादियों में देरी का असर भी पड़ेगा। अमेरिकी के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, अगर गर्भवती महिला को कोविड-19 होता है तो उनके अस्‍पताल में भर्ती होने की संभावना पांच गुना ज्‍यादा होती है।

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