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विशेष लेख – छत्तीसगढ़िया व्यंजनों की बात ही है निराली – डॉ. चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

मैने बीच में दूसरे सामयिक विषयों पर आ गया था । जिसके कारण छत्तीसगढ़ के व्यंजन पर नहीं आ सका। आगे फिर बात करे । हमारे यहां धान का बाहुल्य होने के कारण इनके पदार्थों को काफी महत्ता दी गई । इसमे लाई बडी काफी स्वादिष्ट नाश्ता कहा जा सकता है। यह दूसरी जगह नहीं मिलता है। एक बार खाने पर इसका स्वाद कोई नहीं भूलेगा। वैसे ही यहां चावल के पापड भी अच्छा बनता है। यहां की बिजौरी स्वादिष्ट के साथ स्वास्थय के लिए भी लाभकारी है। वैसे ही त्यौहारों के लिए भी यहां कम चीजे नहीं है। इसमे सबसे पहले पीडिया जो आपको आपके त्यौहार का मजा दुगुना कर देता है। होटल की किसी भी मिठाईयों से बीस ही बैठता है। शुद्ध घी की बनी यह मिठाई बनने के लिए काफी मेहनत मांगती है। यहां की देहरी वडी या देहरौडी दीपावली की स्पेशल डिश है। यह डिश भी काफी मेहनत मांगती है। पुरानी पीढ़ी आज भी इन दोनों को त्यौहार मे जरूर बनाते हैं। पर यह मेहनत ज्यादा होने के कारण अब कम बनती हैं। यहां के लोग अनारसा और गुड अनारसा भी बहुत अच्छा बनाते हैं। इधर की एक और खासियत आटे का मालपुआ भी अच्छा बनता है। वहीं यहां का तिल गुजिया की भी अपनी ही खासियत है। यहां के व्यंजनों में बोबरा पपची इसे मैंने भी नहीं खाया है। पर यहां के लोग इसकी तारीफ बहुत करते है । वहीं फरा और दूध फरा के भी कया कहने ? जिस छत्तीसगढ़ को पिछडा करार दिया गया पर यहां आये बगैर इस तरह की धारणा या मानसिकता बना लेना काफी दुखद है और था । यहां की संस्कृति की जितनी तारीफ की जाए कम है । यहां जो भी एक बार आया सामान्यतः वो यही कारण होकर रह गया है। लोगों में आत्मीयता बहुत-बहुत भरी है । साधारण और सहज लोगों का प्रदेश है इसलिए अगर लिखूंगा तो कुछ लोगों को दुख होगा पर यह कटु सत्य है कि बहुत लूटा गया है। यही कारण है कि यह प्रदेश अब अपनी अस्मिता की लडाई भी लड रहा है। अभी मैंने यहां के व्यंजन की बात की है कभी यहां के संसकृति पर भी विस्तार से लिखूंगा। पर जो भी व्यंजन छूट गये हो तो आप लोग लोगों की जानकारी मे ला सकते हैं। बस इतना ही
डॉ. रामचंद्र चंद्रकांत वाघ

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