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जिंदल ने हजारों मजदूरो को किया बेसहारा, हजारों मजदूर भूखे मरने की कगार पर


जिंदल द्वारा स्थापित पूँजीपत्रा स्थित इंडस्ट्रियल पार्क में सैकड़ो इंडस्ट्रीज इस्थापित हैं जिनको जिंदल ने निर्धारित दर पे अपनी ही बजली बेचने का करार करवाया था और ये इंडस्ट्रीज सालों से वहा चल रहीं थी।

जिंदल के करार के अनुसार वहाँ स्थापित कोई भी इंडस्ट्री को बाहर से या सरकार से बिजली लेने की अनुमति नही है। इन इंडस्ट्रीज की वजह से वहां के हजारों मजदूरो को रोजगार मिल रहा था। मगर पिछले कुछ महीनों से जिंदल ने तानाशाही रवैया इफ्तेयार करते हुए बिजली की दरों को बेहिसाब बढ़ा दिया है जोकि जिंदल के ही किये हुए करार के खिलाफ है।

इन बढ़ी हुई दरो के खिलाफ जो भी इंडस्ट्री आवाज़ उठा रही है या तो उनकी बिजली काट दी जा रही है या तो दिन में मात्र 2 से 4 घंटे ही दी जा रही है। ऐसे में इन इंडस्ट्रीज को चलाना और मजदूरो का पेट पालना दुर्बल हो गया है। इन कारखानों के मालिकों ने जिंदल के इस तानाशाही रवैये के खिलाफ हाई कोर्ट में भी केस दर्ज करवाइये जिसे ये जीत भी चुके हैं।

हाई कोर्ट के आदेशानुसार जिंदल को तत्काल प्रभाव से निर्धारित दरो पे बिजली फुल टाइम चालू करने को कहा गया है लेकिन जिंदल ने ऐसा नहीं किया जिसके परिणाम स्वरूप इंडस्ट्रीज चलना मुश्किल हो रहा है और हजारो मजदूर बेसहारा होते नजर आ रहे हैं।

आज दिनांक 9 जुलाई 2022 को जब पूँजीपत्रा में इंडस्ट्रीज एसोसिएशन एवं मजदूरो द्वारा इसका शांति पूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहा तो जिंदल ने अपने दल बल का इस्तेमाल करके इन्हें अपने ही प्रीमिसेस में टेंट भी लगाने नही दिया।





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