गरियाबंद – रनिंग वाटर योजना ठप्प, अधिकारी कर्मचारी झाड़ रहे पल्ला, जिले में फेल हो गई स्कीम, सरकारी पैसे का जमकर दुरुपयोग

गरियाबंद – रनिंग वाटर योजना के तहत 218 स्कूल और 106 आंगनबाड़ियों में पेय जल उपलब्ध कराने PHE ने पंचायत को पैसा दिया. काम प्राइवेट फर्म से हुआ, इसलिए रखरखाव की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली. 5 माह में 200 से ज्यादा कनेक्शन बंद पड़े हैं. बनाने कोई सामने नहीं आ रहा. देवभोग ब्लॉक के हजारों बच्चे साफ पानी से वंचित हैं.
5 माह पहले जिले के देवभोग विकासखंड में रनिंग वाटर योजना के तहत ब्लॉक के 218 स्कूल और 106 आंगनबाड़ी केंद्रों में पेय जल उपलब्ध कराने योजना लागू किया गया. योजना के तहत वहां पहले से मौजूद वाटर सोर्स में सबमर्सिबल पंप डालकर पीवीसी पाइप के जरिए प्रत्येक प्लास्टिक टैंक लगाया गया.
जरुरत के मुताबिक 5 से 10 टोंटी भी लगवाए गए. यह काम अप्रैल माह से शुरू किया गया. जून जुलाई तक 80 फीसदी काम भी कर लिया गया, लेकिन जब बच्चे स्कूल पहुंचे तब तक ज्यादातर जगह नल की टोटियां और सप्लाई पाइप टूट चुके थे.
पड़ताल में हमने पाया कि साहसखोल, सूकलीभांठा, बरही, पुरनापानी, सेनमूड़ा, घोघर, गोहरापदर, घुमरगुड़ा, सीनापाली, गिरशूल, करलाकोट, सरदापुर, बुधुपारा, भतराबहाली समेत 30 पंचायत के 167 से ज्यादा सरकारी भवन के कनेक्शन से आज तक एक बूंद भी पानी नहीं निकला, जबकि 57 ऐसे कनेक्शन मिले जहां टैंक, पाइप टोंटी के अलावा अन्य सामान टूट कर कबाड़ हो गए हैं.

बिजली नहीं है स्टेबलाइजर की बिलिंग हो गई-पड़ताल में हमने पाया कि मूड़ागाव के लच्छीपुर आंगनबाड़ी में बिजली का कनेक्शन नहीं है. यही हाल गिरशूल के तसिल पारा आंगनबाड़ी का है. घोघर व उसके दर्रीपारा के स्कूल में भी बिजली का कनेक्शन नहीं है.
घोघर में आधा किमी दूर स्थित एक बंद पड़े बोर से पानी लाने का दिखावा किया गया है, लेकिन यंहा के बच्चे आज भी दूसरे जगह के पानी का उपयोग कर रहे हैं. BEO डी एन बघेल ने बताया कि ज्यादातर स्कूलो में स्कीम के तहत लगे सोर्स से नहीं, बल्कि निजी और संस्था के वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे पेय जल की व्यवस्था की गई है.

हमने काम नहीं किया, मरम्मत क्यों करें- सरपंच
योजना के तहत स्कूल के लिए प्रति कनेक्शन 1.20 लाख और आंगनबाड़ी के लिए 1.5 लाख मंजूर था. काम कराने का जिम्मा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को दिया गया. योजना में होने वाले खर्च का 85 फीसदी रकम जलजीवन मिशन से और 15 फीसदी राशि पंचायतों को प्राप्त 15 वे वित्त मद से देना था.
स्थानीय इकाई का काम था, लेकिन रिकॉर्ड में एजेंसी ग्राम पंचायत को बताया गया. लिहाजा सभी राशि सम्बंधित पंचायत के खातों में जमा किया जा रहा है. योजना में 3 करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे. अब तक आधी रकम पंचायत के खाते में जमा होकर आहरण भी हो गए हैं. पंचायत के सरपंचों से बात करने पर कहा कि हमें पता ही नहीं की हम एजेंसी हैं. जमा पैसे को निकाल कर एक फर्म को ट्रांसफर कर दिया गया. निर्माण करने वाले ही इसकी मरम्मत करेंगे.

जिम्मेदारी कौन लेगा तय नहीं, फेल हो गई स्कीम
पंचायतों के हाथ खड़े करने पर हम बंद पड़ी योजना चालू कैसे होगी. इस सवाल के साथ जब बीइओ डीएन बघेल से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि जब स्कूल लगे तो 100 स्कूलों में कनेक्शन टूटे फूटे मिले थे. प्रधान पाठकों ने पीएचई विभाग को भी सूचित किया.
अधिकारियों ने कहा कि हमें अब तक योजना को हैंडओवर नहीं किया गया है. ऐसे में टूटे मिले योजना को किस मद से चालू कराए मार्ग दर्शन ले रहे हैं. मॉनिटरिंग करने वाले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एसडीओ एके भार्गव ने कहा कि जहां लगाए गए उन्ही संस्थाओं को देखभाल करना था. कुछ जगहों से बंद होने की सूचना मिली है. काम करने वालों को मरम्मत के लिए कहा गया है।





