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छत्तीसगढ़ में जश्न, फूटे पटाखे, विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित


छग विधानसभा में शुक्रवार को भारी गहमागहमी और शोर शराबे के बाद आरक्षण संशोधन विधेयक सर्व सम्मति से पारित हो गया। संशोधन विधेयक में अनुसूचित जनजाति को 32, अनुसूचित जाति को 13, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 4% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

संशोधन विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) 1994 के छत्तीसगढ़ राज्य में अनुकूलन के बहुत लंबे समय बाद वर्ष 2011-12 में तत्कालीन सरकार जागी थी। आज उस सरकार के लोग विपक्ष में हैं और वे हम पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन 2004 से लेकर 2012 तक की लंबी अवधि तक जब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों का नुकसान होता रहा, तब इन्हें इस बात की चिंता क्यों नहीं हुई। आज जब हमारी सरकार संशोधन विधेयक के माध्यम से इन वर्गों के लिए प्रावधान लेकर आई है, तब वे न तो आरक्षण की जरूरत पर चर्चा कर रहे हैं और न इस बात पर कि छत्तीसगढ़ की परिस्थितियां क्या हैं?

सीएम बघेल ने कहा कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में सरजियस मिंज कमेटी की रिपोर्ट को प्रस्तुत ही नहीं किया गया। सरजियस मिंज कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अन्य प्रदेशों में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक है और इसे छत्तीसगढ़ में बढ़ाया जा सकता है। इस रिपोर्ट को भी हाईकोर्ट में जमा नहीं किया। इंदिरा साहनी प्रकरण का उल्लेख किया जा रहा है। उस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार अपने राज्यों के परिस्थिति के अनुरूप 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण करने का निर्णय कर सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्वांटिफाइबल आयोग के डाटा में ईडब्ल्यूएस का आंकड़ा 3.48 प्रतिशत ही आया है, जबकि हमने 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। इसी तरह ओबीसी की जनसंख्या 42.41 प्रतिशत है जबकि हमने उन्हें 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है।

सीएम बघेल ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 12 प्रतिशत से कुछ अधिक थी। हमने 13 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। यदि आगामी जनगणना में 16 प्रतिशत जनसंख्या आती है तो हम 16 प्रतिशत आरक्षण देंगे, जैसा कि पक्ष-विपक्ष के लोग मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति एवं जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुसार ही आरक्षण देने का प्रावधान है। आरक्षण के मामले में जिला एवं संभाग संवर्ग में निश्चित रूप से रोस्टर लागू होगा। जिन स्थानों पर सामान्य वर्ग की जनसंख्या ज्यादा है, वहां पर संभाग/जिला संवर्ग में ईडब्ल्यूएस को जनसंख्या के अनुपात में अधिकतम 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

सीएम ने कहा, आरक्षण विधेयक की जितनी चिंता हम सब को है, उतनी ही राज्यपाल को है। वे कह चुकी हैं कि उनके सामने विधायक आते ही वे तत्काल दस्तखत करेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विधेयक पारित होते ही वे मंत्रियों सहित राजभवन जाएंगे और आज ही राज्यपाल से दस्तखत करने का आग्रह करेंगे।

मुख्यमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि सभी दल दलगत भावना से ऊपर उठकर छत्तीसगढ़ की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलकर छत्तीसगढ़ में आरक्षण के नए प्रावधानों को 9वीं अनुसूची में शामिल करने का प्रयास किया जाए।

वहीं नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा, आरक्षण का लाभ सभी वर्गों को मिले इसलिए हमने समर्थन दिया। संशोधन विधेयक को 9वीं अनुसूची में शामिल करने राज्यपाल के हस्ताक्षर के बिना भारत सरकार को भेजने शासकीय संकल्प का निर्णय लिया गया, हम इसका विरोध करते हैं। ये शासकीय संकल्प को राज्यपाल के पास नहीं भेजना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पर महामहिम राज्यपाल के हस्ताक्षर हो जाते, उसके बाद राजपत्र में प्रकाशित हो जाता, लेकिन राज्य सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों है?

Source by ANI_HindiNews

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