मस्तूरी ब्लाक में सिक्का-सिक्का जोड़कर बेटे ने खरीदवा दिया ट्रैक्टर

बिलासपुर। मस्तूरी ब्लाक के ग्राम मनवा निवासी किसान रमेश पटेल घर की छोटी-सी परचून दुकान की बचत से ट्रैक्टर मालिक बन गए हैं। वे पिछले चार वर्षों से सामान बिक्री के बाद मिले सिक्कों को बेटे को दे दिया करते थे और बेटा अपनी मां के सहयोग से जमा करते रहा। धीरे-धीरे दो लाख से ज्यादा रुपये जमा हो गए तो बेटे ने खेती के लिए ट्रैक्टर खरीदने का सुझाव दिया। रमेश भी 16 बोरियों में सिक्के किराए के वाहन में लेकर एजेंसी पहुंचे। वहां संचालक ने गर्मजोशी से स्वागत करते हुए ट्रैक्टर की चाबी सौंप दी।
रमेश खेती बाड़ी से समय निकालकर दुकान चलाते हैं। गांव में अब भी अधिकतर खरीदार सामान के एवज में सिक्के ही देते हैं। रमेश बताते हैं कि दिनभर की ग्राहकी के बाद गल्ले से नोट निकालकर गिन लेते थे और सिक्कों को बड़े बेटे गगन को सौंप देते थे। 11 साल के गगन मंे संग्रहण की प्रवृत्ति शुरू से ही है। यही कारण है कि वह सिक्कों को जमा करना लगा। पहले छोटी सी पेटी में सिक्के रखता था।
जब वह भर जाती तो मां और बेटा सिक्के गिनते और पालिथिन में बांधकर खाद वाली बोरी में रख देते। एक दिन मां और बेटे ने परिवार के सभी सदस्यों के सामने खेती को और बेहतर बनाने के लिए ट्रैक्टर खरीदने का प्रस्ताव रखा। यह सुनकर रमेश ने सवाल उठाया कि ट्रैक्टर के लिए जरूरी राशि कहां से आएगी। तब गगन व उसकी मां ने बताया कि ट्रैक्टर लोन में लेने के लिए जो राशि जमा करनी है उसे सिक्का-सिक्का जोड़कर जमा कर लिया है।
एजेंसी संचालक हुआ प्रभावित
घर में हुई बातचीत के दूसरे दिन ही रमेश बिलासपुर पहुंचे व ट्रैक्टर एजेंसी संचालक प्रमोद नायक से बात की। उन्होेंने बताया कि उसके पास दो लाख रुपये से अधिक के सिक्के हैं। ट्रैक्टर के बदले में सिक्का लेने का प्रस्ताव रखा। प्रमोद ने पूछा कि आखिर इतने सिक्के उनके पास आए कहां से। तब रमेश ने बेटे व पत्नी के द्वारा सिक्का जमा करने की जानकारी दी। प्रमोद इससे प्रभावित हुए और लोन के जरिए ट्रैक्टर फाइनेंस करने हामी भर दी।




