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आलेख – अतीत और वर्तमान में छत्तीसगढ़ में जीवट पत्रकारिता की मिसाल पेश करते ये बड़े नाम

 मै वयस्त होने के कारण मै हिंदी पत्रकारिता दिवस के दिन इस विषय पर लिखना चाहा पर पूरा नहीं कर सका कल ही शायद यह लेख आपके पास आए पर देर से ही सही पत्रकारिता दिवस है मै आपको यहां के मूरघनय पत्रकारों से परिचित कराऊ ।  पहले मै अंचल के राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों का उल्लेख करूंगा जिसमे सबसे बडा नाम आजादी के समय का रहा है स्व. माधव राव सप्रे  जी जिनका स्वतंत्रता संग्राम मे योगदान रहा  है  । इसलिए छत्तीसगढ़ के निर्माण के बाद उनकी यादों को अक्षुण्ण रखने के लिए पत्रकारिता में माधव राव सप्रे पुरस्कार रखा गया है। उसके बाद एक और बडा वह है साहित्य कार और पत्रकारिता दोनों मे अपनी पहचान रखने वाले स्व. गजानन माधव मुक्तिबोध जी का है । आज भी उनके लिखे हुए लेखो की समीक्षा होती है ।  फिर सातवे दशक मे दो पत्रकार के नाम जिनमे स्व. चंदूलाल चंद्राकर जो बाद मे दुर्ग से सांसद भी बने । दूसरा नाम न्याय धानी बिलासपुर से स्व. श्री कांत वर्मा जी का रहा है  जो देश के विख्यात पत्रिका दिनमान के संपादक रहे है।  वो भी कांग्रेस से सांसद और महासचिव भी रहे है । कहा से शुरू करूं पर मै पत्रकारिता के बारे मे जो मेरा परिचय है वह आठवे दशक के बाद से है पर मैंने जिनके बारे मे सुना है मै  वही से उल्लेख करने जा रहा हू और जिनके संपर्क में आया उनके बारे मे लिख रहा हू । चलो मै बचपन से शुरू करूं मेरे यहां तबके महाकोशल के पत्रकार स्व. शंकर देव मानव मेरे पिता के मित्र थे ।  वो सर्वोदय आंदोलन से आए हुए थे । फिर मै स्व. रममू श्रीवास्तव जी के बारे मे बहुत सुना था पर उनको ज्यादा पढ नहीं पाया ।  फिर मै पत्रकारिता के क्षेत्र में बाबूजी के नाम से विख्यात वो और कोई नहीं नई दुनिया के संपादक बाद मे उन्होने अपने लोकप्रिय   पेपर देशबंधु  की नींव रखी। खुलकर समाज के प्रगतिशील विचारों को रखते थे स्व. मायाराम सुरजन जी जिनके लेखो  का लोग इंतजार करते थे । फिर उसी परंपरा को स्व. ललित सुरजन ने भी निभाया । पर अपने ही लेखो के खिलाफ भी बगैर काट-छांट किये विचारों का सम्मान भी देशबंधु के पूर्व संपादक रहे और जिन्होंने इस अंचल मे सांध्य पेपर को करीब करीब प्रातः जैसे अखबारों से परिचित कराया मुझे खुशी है कि उन्होंने दोनों ही समय मे मेरे लेख को पूरी जगह दी वह कोई और नहीं आज के छत्तीसगढ़ के संपादक श्री सुनील कुमार जी है । वहीं देशबंधु के एक और पत्रकार जिनको लोग पढना चाहते थे वो स्व. राजनारायण जी थे । वहीं देशबंधु मे एक और उल्लेखनीय संपादक रहे है स्व. रामाश्रय उपाध्याय जी ।  वहीं नईदुनिया मे एक पत्रकार रहे जिन्होंने कविता छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर बहुत लिखा स्व. स्वामी कृष्ण रंजन जी जो एक अच्छे भागवत प्रवचन कर्ता भी थे मै खुश नसीब हू मुझे मिलने के लिए बुलाते थे । वहीं अभी मुझे पता चला कि मेरे मित्र श्री बसंत दुबे  के पिता पूर्व नगरपालिका रायपुर के उपाध्यक्ष वह भी हितवाद , टाइम्स ऑफ इंडिया,  अमृत बाजार , पीटीआई जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों के पत्रकार रहे है । अब मै रायपुर के सबसे पुराने पेपर नवभारत की बात करू ।  इस समाचार पत्र से भी बहुत लोग जुडे । जहां से मुझे जानकारी है मै स्व. गोविन्द वाल वोरा इस पेपर के संपादक रहे है । उस समय नवभारत को ऊँचाइयाँ स्व. वोरा जी ने दी ।  मै उनके एक और समाज सेवा के काम से लोगों को अवगत कराना चाहूंगा वह है यहां के लोगों के गरीबी देखकर उनहोंने छत्तीसगढ़ नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की और यहां निम्नतम दर मे और वही निःशुल्क आंखों से संबंधित सभी बिमारीयो के लिए एक विश्वनीय संस्थान बनाया जिसमे मेरे मित्र स्व. डा . विजय मेहरा ने अपना पूरा सहयोग दिया । इसके बाद स्व. गोविन्द वाल वोरा जी ने अपने पेपर अमृत संदेश की स्थापना की आज उनके पुत्र श्री गिरीश वोरा जी उसके संपादक भी है । इसके बाद नवभारत प्रेस मे मेरे आदर्श रहे बहुत सादगी से परिपूर्ण विद्वान संपादक पूर्व मे वे युगधर्म के भी संपादक रहे एक स्वंय सेवक भी जिन्होने संघ और जनसंघ को बाद में भारतीय जनता पार्टी की गतिविधियों मे अपनी अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई  वह थे स्व. बबन प्रसाद मिश्रा जी  ।   आपातकाल के समय युगधर्म के संपादक होने के कारण वह भी राडार मे थे ।  स्व. मिश्रा जी के भी गिरफ्तारी वारंट निकल चुका था  ।  युगधर्म को बंद कर दिया गया था ।  फिर उन्होंने तत्कालीन जिलाधीश की अनुमति से प्रेस की चाबी नागपुर मे सौपने के लिए समय मांगा और थाना कोतवाली को बताकर रात को ही नागपुर रवाना हो गये ।  बिल्कुल उनहोंने अपनी चाबी सौंपी और वापस रायपुर आकर अपने मित्र  रैयकवार के साथ गिरफ्तारी देने कोतवाली पहुंच गए पर उनके गिरफ्तारी की खबर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल भी पहुंच गई थी । जब यह लोग थाने पहुंचने पर पता चला कि उनके गिरफ्तारी का आदेश निरस्त हो गया है ।  करीब चालीस दिनो तक प्रेस बंद रहा।  स्व. मिश्रा जी के संपर्क मे जो आया वो उन्ही का हो गया बहुत स्नेह  ।   अब आगे नवभारत मे श्री अनिल प्रकाश शुक्ल जी आए । पहली मुलाकात मे लगेगा नहीं की किसी एक बडे समाचार पत्र के संपादक से मिल रहे । छोटे छोटे पाठको के नाम से पत्र लिखने वाले इस बंदे ने क्रिकेट के उपर आलेख लिखा सोचा भी नहीं था कि एक साधारण से आदमी को जगह मिलेगी  ।  उस दिन मै नागपुर जा रहा था रास्ते मे चिचोला के पास  जब रूका और होटल मे मैंने जब पेपर पर नजर मारी संपादकीय पेज मे क्रिकेट के लेख को जगह देखकर सहसा मुझे विश्वास ही नहीं  हुआ श्री शुक्ला जी ने मुझे लेखक बना दिया।  पर मै उनका आभारी रहूँगा।  बहुत अच्छे वयक्तितव के मालिक है  । फिर श्री श्याम वेताल जी आए । बस उस कुर्सी पद को जैसे पुराने लोगों ने ऊँचाइयाँ दी उसमे वेताल जी का नाम भी जुड़ गया।  बगैर हैडिंग के लेखो को लिखने की मेरी आदत मे यह सुझाव और सुधार दोनों किया। काफी अंतरंग बात करने वाले श्री वेताल जी सहजता से अपनी बात कह जाते थे । जब भी जाओ काफी पियें बगैर आने नहीं देते थे । उनके समय भी बहुत लिखा  ।  वेताल जी ने ही मुझे बताया कि मेरे लेखों को नवभारत अपने सभी संस्करण मे ले रहा है । एक लेखक के तौर पर और क्या चाहिए था।  जब लोगों को पता चला कि  मै अभनपुर से हू तो विश्वास ही नहीं हुआ  । वेताल जी जाने के बाद रायपुर मे ही पढे लिखे यही कारण है कि रायपुर के मर्म को समझते है । पहले देशबंधु के लिए बहुत अच्छा काम किया फिर न्यूज चैनल के लिए  रिपोर्टिंग  फिर अचानक खबर आई कि श्री रूचिर गर्ग नवभारत के संपादक बन गये ।  पर वो ज्यादा समय तक नहीं रहे उन्होंने इस्तीफा दे दिया।   खबर यह थी कि रायपुर विधानसभा चुनाव लड रहे है ।  फिर खबर आई कि वो मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नियुक्त हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा है ।  पर एक पत्रकार के नाते वो काफी मुखर थे ।  पर अब अपनी दूसरी पारी और रोल में वयस्त है  ।   फिर नवभारत का हर समय मुसकुराते हुए रहने वाले शख्स श्री राजेश जोशी जी संपादक बन गये । मेरा उनसे बहुत पुराना संबंध था । अभनपुर के एक गांव के मेरे कहने पर उनहोंने एक स्टोरी बनाई थी ।  हर समय जन्मदिन मे याद करना उनकी विशेषता है । इस संपादक की तारीफ करनी होगी कि अपने लेख के लिए वो एफ बी का सहारा लेते है । बहुत मिलनसार सादगीपूर्ण वाले वयक्ति है  ।  नवभारत मे काफी लेख छपे इसलिए यहां ज्यादा ही संपर्क रहा है।   एडिटर राजेश शर्मा जी आज सेवानिवृत्ति मे है । पर अनेक लेखो मे किसको कब जगह देनी है कैसें देनी है यह राजेश शर्मा जी तय करते थे ।  बस आजकल मे चलाता हू डा साहब  ।  मैंने देखा था कि अव्यवस्था के खिलाफ लेखो को बहुत पसंद करते थे । पर उनकी सीमा थी उसी दायरे मे रहकर उनहोंने बखूबी अपना काम किया  ।  एक नाम और जो पत्रकार नहीं पर एफ बी मे उस भूमिका मे भी नजर आ जाते है।  जिन्होने अपने फोटो ग्राफी से पूरे रायपुर को हर समय के काल मे कैद किया हुआ है और नवभारत के हर फोटो जो जीवंत नजर आते है वह कोई नहीं सबका भैया गोकुल भैया गोकुल सोनी जी है । जब अपने पुराने फोटो से याद दिलाते है । फिर यहां श्री बसंत वीर उपाध्याय जी का काम भी मैने देखा है ।  सरल स्वभाव के उपाध्याय जी अब बिलासपुर मे सेवाएं दे रहे है । अब दैनिक भास्कर में आया जाए बहुत पत्रों को जगह दी लोग मेरे पत्रो का रास्ता देखते थे ।  शुरूआत के दिनो में दैनिक भास्कर को स्थापित करने के लिए एक बहुत अच्छे संपादक की आवश्यकता थी बस एक जगह निगाहे रुकी वो और कोई नहीं मेरे प्रेरणा स्रोत सरल स्वभाव के संबंधों को सहज कर रखने वाले छत्तीसगढ़ के पत्रकारो के भीष्म पितामह आदरणीय श्री रमेश नैयर सर है । पता नहीं कितने पत्रकारों ने उनके सानिध्य में काम किया और उनसे सीखा है।  मै छोटे छोटे पत्र उस समय दैनिक भास्कर में लिखता था और सर से जरूर मिलता था ।  नीमा के एक कार्यक्रम में मैने सर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया  था ।  मुझे लगा सर इस सीएमई मे नहीं बैठेंगे इसलिए अधक्षयता के उदबोधन के लिए आमंत्रित किया तो उनहोंने विरोध किया  पर फिर आग्रह करने से उन्होंने उदबोधन दिया ।  पर सभी चिकित्सक हैरान हो गये सर पूरे देर बैठे वो भी कम से कम पांच छै घंटे फिर उनका फिर उदबोधन हुआ उनहोंने सभी विशेषज्ञ चिकित्सक के उदबोधन को संदर्भित कर इतना अच्छा अपना विषय रखा सब लोग हैरान रह गये । जब रिपोर्टिंग की बात आई तो उस फोटो को न्यूज के लिए चुना जिसमे सर की फोटो नहीं थी । मेरे बहुत आदर्श रहे है अभी भी फोन मे मिलने के लिए जाना है कहता हू पर हालात सामान्य नही है के कारण जा नहीं पा रहा हूं। अब दैनिक भास्कर के एक और संपादक देश प्रदेश में विख्यात स्व. गजानन माधव मुक्तिबोध के पुत्र प्रतिष्ठित पत्रकार संपादक दिवाकर गजानन मुक्तिबोध हर समय मुसकुराते रहना मुक्तिबोध जी की खासियत है उम्दा लेखन उत्कृष्ठ पत्रकारिता के वाहक रहे है । अंचल के हर प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में अपनी सेवाएं दी है । विरासत मे मिले नाम के साथ न्याय किया। इसी परिसर से दैनिक भास्कर से एक और युवा पत्रकार ने दस्तक दी थी वो पत्रकार मेरे मित्र और बडे भाई आसिफ इकबाल  बहुत संवेदनशील स्टोरी उन्होंने कवर की है हर समय खुश मिजाज इस पत्रकार ने अपनी जगह बना ली।  एक छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित नाम सुविख्यात कवि और बेहतरीन फोटो जिनके आज भी साक्ष्य है स्व. बसंत दीवान जी मैंने उन्हे बहुत सुना है । इसी क्रम मे पहले युगधर्म मे अपनी पत्रकार के रूप मे सेवाएं दिये हुए बाद मे दिल्ली रूख कर एक अच्छे मुकाम पर पहुंचकर प्रदेश को गौरवान्वित किया श्री जगदीश उपासने  देश के प्रमुख पत्रिका इंडिया टू डे के संपादक रहे है वही भोपाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे है । युगधर्म के दो पत्रकार का उल्लेख करूंगा श्री सुहास राजिमवाले और श्री विजय भट्टाचार्य जी और लोगों की चर्चा करूंगा इसमे एक नाम और है वह है  प्रतिष्ठित कवि साहित्य कार स्व. नारायण लाल जी  परमार के सुपुत्र विरासत मे ही उन्हे साहित्य मिला हुआ था कवि पत्रकार फोटो ग्राफर जिनकी सेवाएं प्रदेश के अखबारों ने ली है वह और कोई नहीं निकष परमार है । चलो अब मै उनकी बात करू जो पत्रकार तो नहीं रहे पर समाचार पत्रों के माध्यम से समाज के विषयों को उठाते रहे है । ऐसे मे मै थोड़ा पक्षपात करूंगा इस क्रम में मै अपने पिता स्व. डा . रामचन्द्र विनायक वाघ का उल्लेख करूंगा जिन्होने आज से पांच दशक पहले केशरी दाल के उपयोग से पैरालिसिस की बात सामने लाई । फिर आयुर्वेद पर उनहोंने बहुत लिखा । दूसरा नाम और कोई नहीं शासकीय  इंजीनियरिंग महाविद्यालय के प्राचार्य डा .देवकीनन्दन खंडेलवाल जी है जिन्होंने बहुत लोगों को मार्ग दर्शित किया अभी भी फेसबुक के माध्यम से मुक्तक लिख रहे है । पर एक नाम देश के सभी पत्र पत्रिकाओं में हिंदी और अंग्रेजी मे छाया  रहा है बाद मे उन्होने स्थानीय समाचार पत्रों के लिए भी लिखा मुझे कहने मे कोई संकोच नहीं है कि उन्हे वह न्याय नहीं मिल पाया जिसके वो हकदार थे ।  एलआइसी मे कार्य रत थे । जयंत भैया स्व.जयंत राजिमवाले कितनी कहानियां अर्थ शास्त्र पर बहुत विद्वान शख्स के साथ बहुत सादगी पूर्ण महान शख्स थे ।   बिलासपुर के नवभारत के पत्रकार स्व. बी आर यादव भी बाद मे विधायक बनकर मध्यप्रदेश मे काबीना मंत्री बने । एक और हरफनमौला दोस्तो का दोस्त मस्त सदाबहार दादा के नाम से जाना पहचाने वाला नाम जो बाद में रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष भी बने मेरे छोटे भाई  श्री अनिल पुसदकर ने भी एक महती भूमिका निभाई है।    अभनपुर क्षेत्र के दो पत्रकार जिसमे प्रथम श्री चंद्रशेखर साहू जो बाद मे कृषि मंत्री बने और दूसरे श्री अशोक बजाज जो आगे चलकरवेयर हाउस बोर्ड के अध्यक्ष बने ।  मेरे  दोनों छोटे भाई  हमारे ही  ही बिरादरी के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के लेक्चरर डा . संजय शुक्ला व डा . एच . एम शुक्ला के लेखो ने भी काफी स्वास्थय के क्षेत्र मे  सामाजिक क्षेत्र मे अहम भूमिका रही है  ।  इन्ही  लोगों  मे एक नाम जो पूर्व पत्रकार रहा है अभी भी रोचक लेख से ध्यान आकर्षित करते रहता है मेरा छोटा भाई अजय वर्मा है।  मै उन दोनों पोर्टल संपादक के नाम भी उल्लेख करूंगा जिन्होने मुझे जगह दी है और दे रहे है पहला नाम पाजिटिव इंडिया के संपादक श्री पुरुषोत्तम मिश्रा और दूसरा नाम सी जी 36 के श्री  चंद्रिका अवस्थी का है ।  अंत मे एक नाम मेरा डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ जो थोड़ी थोड़ी कोशिश हर समय करते रहा है । मै उन लोगों से भी क्षमा चाहूँगा कि अगर किसी का नाम कहीं भी धोखे से छूट जाए तो माफ कर देना  । वैसे मेरी कोशिश रही है कि मै सब तक पहुंच सके  पर जब लिखने लगा तो इसके गहराइयों का मुझे अंदाज नहीं था । इस लेख मे मैंने अपने मित्र श्री दिवाकर गजानन मुक्तिबोध से सहायता ली है । इसके बाद जब यह लेख छपे तो उन सम्मानित पत्रकार के नाम आप जरूर उल्लेख करे जिन्हे मै बाद मे छोड सकूं  उम्मीद करूंगा यह लेख आप लोगों को पसंद आए । 
बस इतना ही 
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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