
सोनु केदार अम्बिकापुर – बिलासपुर से तीन हजार सैम्पल सरगुजा आने के बाद वायरोलॉजी लैब की चिंता बढ़ गई है दरअसल कोरोना संक्रमण की जंग में सबसे बड़ा कार्य संक्रमितों की पहचान करना होता है जिसके लिए अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के माइक्रो बायोलॉजी विभाग द्वारा वायरॉलजी लैब की स्थापना किया गया है।
इस लैब में सरगुजा संभाग के सभी जिलों से आये आरटीपीसीआर सैम्पल की जांच की जा रही है लेकिन अब बिलासपुर संभाग से भी बड़ी संख्या में सैम्पल जांच के लिए भेज दिए गए है जिसके बाद वायरोलॉजी विभाग की चिंता बढ़ गई है
अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज के वायरॉलजी लैब में सिमित संसाधनों की कमी के बाद भी एक हजार से 15 सौ तक आरटीपीसीआर टेस्ट किए जा रहे थे लेकिन अभी सामग्री की कमी के कारण यह टेस्ट 9 सौ तक सिमट गया है। ऐसे में अपने ही संभाग के कई जिलों के सैम्पल पेंडिंग हो जा रहे है।
बता दें कि जिले में कोरोना मरीजों की जांच के लिए सिर्फ एक ट्रू नॉट मशीन ही उपलब्ध है और इसी से सभी टेस्ट किए जा रहे है। वर्तमान में संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के बाद वायरोलॉजी विभाग पर भी दबाव बढ़ गया है इस बीच बताया जा रहा है कि बिलासपुर सिम्स से भी तीन हजार सैम्पल जांच के लिए भेज दिए गए है। ये सैम्पल मुंगेली जिले के है और पांच से छह दिन पूर्व लिए गए थे व दो दिन पूर्व अंबिकापुर पहुंचे है।
अपने जिलों के सैम्पल की जांच करने में परेशान वायरोलॉजी लैब के सामने अब इन तीन हजार सैम्पल की जांच एक बड़ी चुनौती बन गई है। यदि इतनी बड़ी संख्या में सैम्पल की जांच करनी है तो जिले के सैम्पल की जांच को रोकना पड़ सकता है जिसे लेकर अधिकारी असमंजस में है और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन का इन्तजार किया जा रहा है।




