
सोनु केदार अम्बिकापुर – प्रदेश सरकार विकास के लाख दावे करे लेकिन आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां ग्रामीण पीने के पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं हम बात कर रहे हैं सरगुजा जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर बसा मुड़ेसा गांव की। कहने को प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव का विधानसभा क्षेत्र है लेकिन इस गांव के ग्रामीणों को आज भी पीने के लिए ढोड़ी तक लंबा सफर तय पड़ता है।
ये नजारा है मुड़ेसा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम कृष्णापुर का.. यहां बसे ग्रामीण आज भी मुलभुत सुविधाओं से कोसों दूर है इस आश्रित मोहल्ले में बसे ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए ढोड़ी का इस्तेमाल करते है। आवागमन के लिए सड़क का पता नहीं बिजली तो घर-घर पहुंची जरूर है लेकिन कम वोल्टेज एक बड़ी समस्या है। दो हजार की आबादी वाला ये गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए बाट जोह रहा है। ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ले में हैड पम्प तो है लेकिन किसी में पानी नहीं निकलता है जिसके चलते ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने गांव से दूर ढोढ़ी जाना पड़ता है, इतना ही नहीं गर्मी के दिनों में ढोड़ी का पानी कम हो जाता है उस दौरान ग्रामीणों को पानी के लिए लाइन लगानी पड़ती है।
पानी की समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीण करीब 02 किलोमीटर की पैदल रोजाना सफ़र करके ढोढ़ी से पानी भरकर लाते हैं. तब जाकर इनकी प्यास बुझ पाती है… पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों की समस्या को लेकर जब हमने सरगुजा कलेक्टर संजीव कुमार झा से सवाल किया.. तो उन्होने जल्द ग्रामीणों की समस्या को दूर करने की बात कही है
बहरहाल मुड़ेसा ग्राम पंचायत की आश्रित मोहल्ला कृष्णापुर की समस्या को जिला मुखिया ने जल्द से जल्द ठीक करने का आश्वासन तो दिया है लेकिन देखना होगा कब तक पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण राहत की सांस लेते हैं या फिर समस्या जस की तस बनी रहती है।




