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बांकी जलाशय का स्लूस गेट टुटा हुवा, जिम्मेदार घुमा रहे इसकी टोपी उसके सर, गर्मी अंबिकापुर में पेयजल संकट का खतरा

सोनू केदार सरगुजा – कई वर्षों से अंबिकापुर शहर में पेयजल आपूर्ति का माध्यम बांकी जलाशय है।  इस जलाशय के स्लूस गेट के खराब हो जाने के कारण चौबीस घंटे से लगातार बड़े पैमाने पर जलाशय का बेशकीमती पानी बांकी नदी में बाढ़ की तरह बह रहा है। स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी थर्मल पावर विभाग के अधिकारियों को दी पर स्लूस गेट को ठीक करने की कोई त्वरित पहल नहीं की गई। हालांकि मिशन अमृत के तहत घुनघुट्टा जलाशय से अब शहर में प्रथम चरण 50 लाख लीटर प्रतिदिन पानी आ रहा है पर बांकी जलाशय से अभी भी शहर की प्यास नहीं बुझा रहा है। हर रोज एक करोड़ 70 लाख लीटर पानी बांकी जलाशय से तकिया फिल्टर प्लांट आ रहा है।

इधर नगर निगम के कमिश्नर ने बताया कि अम्बिकापुर शहर के लिए प्रतिदिन 17.50 एमएलडी पानी बाकी जलाशय से लिया जाता है। अगर बेवजह पानी का रिसाव जलाशय से हो रहा है तो यह हमारी जवाबदारी नही है। यह थर्मल पावर के अधीन में आता है।

इस बांकी जलाशय को लेकर थर्मल पावर के कार्यपान अभियंता ए के खलखो ने कहा कि शहर को 10 क्यूशक पानी प्रतिदिन दिया जाता है। जलाशय का देख रेख डब्लूआरडी करता है लेकिन जो गेट का काम है यह एनडेएम के माध्यम से होता है। वहीं अधिकारी भी मान रहे है कि बेवजह पानी का रिसाव तो हो रहा है लेकिन गोताखोर के नही आने से अभी तक काम नही हो पाया है।

बहरहाल बांकी जलाशय का स्लूस गेट वर्षों से खराब है। बता दें कि वर्ष 1987 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा ने इसका शुभारंभ किया था। एक लंबा समय होने के कारण स्लूस गेट खराब हो गया। स्लूस से गेट पानी कम होने के बाद ही मरम्मत किया जा सकता है लेकिन शहर में पेयजल आपूर्ति बाधित न हो इस कारण स्लूस गेट की मरम्मत नहीं कराई जाती। लेकिन स्लूस गेट से लगातार पानी निकल रहा है।  ऐसे में आने वाली गर्मी में जल संकट उत्पन्न होने का खतरा भी मंडराने लगा है।

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