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मेरे आंदोलन की परिकल्पना विशेष लेख – गोली भी चल जाए बम ब्लास्ट भी हो जाये हम डरते नहीं है न हम यह प्रदर्शन रोकेंगे

आज मै कसम खाता हू कि इस सशक्त सरकार को मुद्दा विहीन आंदोलन कर जहां वार्ता के लिए बाध्य कर दूंगा।  वहीं इस आंदोलन को बिलकुल राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में पहले अहिंसक दौर मे ही रखा जाएगा।  वहीं हम क्रांतिकारी है तो इक्का दुक्का घटनाऐ आम बात है।  वैसे भी शासकीय संपत्ति अपनी है इसे ख्याल मे रखकर सडकों पर धरना-प्रदर्शन उसे जाम करना हमारे मौलिक अधिकार मे शामिल है । हमारे आंदोलन की खासियत यह रहेंगी कि वह हमारे ही शर्तो पर खतम  होगी । इसमे मै आपको बता दू कि हम इसमे अपने समझौते मे किसी भी मान मननौवल की गुंजाइश से इंकार करते है । सेवा भावी आकर इसमे बेहिचक भाग ले सकते है । हमनें प्लान किया हुआ है कि जब तक यह मुद्दे विहीन मांग पूरी नहीं होती हम किसी भी कीमत पर आंदोलन खत्म करने के पक्ष में नहीं है । हमनें अपनी मंशा जता दी है कि गोली भी चल जाए बम  ब्लास्ट भी हो जाये हम डरते नहीं है न हम यह प्रदर्शन रोकेंगे।  हम सरकार के बदलने तक इस आंदोलन की रूपरेखा के साथ आये हुए हैं। सरकार कितनी भी मन्नत कर ले लोगों को कितनी भी असुविधा हो जाये उससे हमे कोई लेना-देना नहीं है।  हमारे उपर कोई भी कानून नहीं लगता।  हमे मानवाधिकार के लोगों से समर्थन प्राप्त है । हमे उन तथाकथित बुद्धिजीवियों का समर्थन प्राप्त है जो ऐसी सरकार को तनिक भी बर्दाश्त करने के मूड मे नही है । ऐसे लोगों का हमे हर समय आंदोलन मे सहयोग के साथ आशीर्वाद प्राप्त है । यह आंदोलन ही है जब हमारी पूछ परख होती है  । हमे आज के हर मीडिया चैनल समय लेने के लिए तरसते हैं।  हम लोग घूम घूम कर टीवी मे अपने को पाकर आल्हादित भी होते है । हमारी राजनीति के सामने लाखों वोट पाकर बने राष्ट्रीय नेता तक बौने है।  हम वो राजनीतिज्ञ है जिनकी जमानत जब्त होने के बाद भी इतना राजनीति मे दखल रखते हैं कि शासन की चूले तक हिल जाती है । हमारे सामने सरकार वार्ता के लिए बाध्य हो जाती है।  हालात तो यह है कि हमारे साथ भोजन करने मे मंत्री तक अपने को अहो भाग्य समझता है।  मै बता दू कि हम तंग दिल भी नहीं है हम अपने आंदोलन कारियों का पूरा ध्यान रखते है । जिस बंदे को घर मे भी गरम गरम रोटी नसीब नहीं। होती वहीं काफी के प्याले अनगिनत बार पीकर अपने गले को तर कर सकता है । वहीं नाश्ते मे हम फरमाइश पर सब उपलब्ध करा देते है हमारे आंदोलन की खासियत यह कि हम सर्व संपन्न आंदोलन की कल्पना करते है इसलिए आंदोलन कारियों के लिए सूखे मेवो और फलों का हम विशेष इंतजाम करते है । किसी को और कया चाहिए  ?  हमारी खासियत है कि हम जब राजनीति करते हैं तो हम संवेदन हीन हो जाते किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस गुण का होना आवश्यक रहता है । हमारे आंदोलन मे कोई भी मरे या जिए वो अपनी बला से वो तो सिर्फ हमारे राजनीति के लिए आंकडा मात्र है । हम उस मिट्टी के बने है आंदोलन समाप्त करने के लिए हमारे से कोई भी विनंती करे यहां तक भगवान भी इसमे शामिल हो जाये हम टस से मस नहीं होने वाले है । इस मुद्दे विहीन आंदोलन मे यह खासियत है कि हमे किसी के पास समर्थन मांगने जाना नही पड़ा यह देवता जैसे लोग स्वंय चलकर आए और हमे आशवसत कर गये कि आप जितना लंबा आंदोलन को खींचेंगे उतना ही हमारा समर्थन मजबूत होकर मिलेगा वहीं यह तक आशवसत किया था कि संसाधन और आर्थिक स्थिति की आप बिलकुल चिंता न करे हम लोग है । आज के समय भी ऐसे लोगो का मिलना सौभाग्य की बात है।  मै मुद्दा विहीन आंदोलन का वो नायक हू जो अपने कहीं गए बातो पर पलटने का सामर्थ्य रखता हू । मै वो नायक हू मुद्दे को समझने के बाद हल होने तक दिखने के बाद भी नहीं समझने का खेल भी खेल लेता हू । मै ऐसे आंदोलन का वो नायक हू जिसे न बोलना  नहीं आता तो भी इस तरह के वार्ता का केंद्र बिंदु मै ही बनता हू ।  कितना लिखू  मै वो नायक हू जो इस तरह की सुविधा मुहैया कर आंदोलन मे बेतहाशा भीड़ लाने की खींचने की क्षमता रखता हू । मै वो नायक हू जो आपको हर आंदोलन मे वैसे ही दिखता है ” पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिसमे मिलाओ उस जैसा ” । मै वो नायक हू जिसको न देश से मतलब न कानून से मतलब न संविधान से मतलब हमारे दुनियां में हमारा ही सब लागू होता है।  मजे की बात है हम सब गुजर जाते है और ठीकरा सामने वाले के उपर फोड जाते है । और वाहवाही हमारे नसीब ही होती है यह भी हमारे नायकतव का हिस्सा है।  हमारे आंदोलन की खासियत यह रहतीं है कि हमारे उपर कोई भी कानूनी कार्रवाई लोकतंत्र के खतरे का हिस्सा बन जाती है।  हमारे तकरीर मे कुछ भी कहे उसे आंदोलन का हिस्सा माना जाता है।  मै इस देश को धन्यवाद दे दू मै यहा के लोकतंत्र को धन्यवाद दू मै यहा के संविधान को धन्यवाद दू मै यहा के राजनीति को धन्यवाद दू मै यहा के अहिंसक आंदोलन मे समाहित हिंसक आंदोलन के लिए  धन्यवाद दू मै उन लोगों को भी धन्यवाद दू जो बिना किसी नाम के हमे आर्थिक सहायता प्रदान करते है मै उन लोगों को भी धन्यवाद दू जो अपने खाने पीने के इंतजाम के चलते जाने अनजाने मे शामिल हो जाते है । मै वो भाग्य शाली बंदा हू बगैर कुछ किये सब कुछ कर लेता हूं।  मेरा मुद्दा विहीन आंदोलन जरूर कामयाब होगा ।  इसी आशा के साथ   ।   बस इतना ही। डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ ( यह लेखक के निजी विचार हैं )

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