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आलेख – निष्पक्ष लेखक हर समय निशाने मे रहता है – डॉ. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

आज मै लेख पर प्रतिक्रिया पर लिख रहा हू। यह राजनीतिक बिरादरी की खासियत यह रहतीं है कि सिर्फ यह अपनी प्रशंसा ही सुनना चाहते हैं। कहने को तो लोकतंत्र है पर लोकतंत्र के पुरोधाओं को यह तब तक स्वीकार रहता है जब तक इनका हित रहता है। फिर इन्ही लोकतंत्र के मसीहाओ को फिर यह चुभने लगता है । बस यही इच्छा रहती है कि राग दरबारी बन कर हां मे हा मिलाओ । मुझे कही लिखने मे संकोच नहीं है कि कुछ परिवार के तथाकथित नेता लोग ही देश के साथ लोकतंत्र का खेल खेल रहे है और हम लोग मूक दर्शक बन कर बैठे हुए हैं। पुश्तैनी व्यवसाय है जहां दूसरो का प्रवेश निषेध है। फिर सामने दाम दंड सब जायज है। पर आप उतना ही लिखो जितना यह चाहते है तो वाह भी वाह । अगर इनके मर्जी के खिलाफ लिखा तो सिर्फ समय की ही राह देखी जाती हैं। यह राजनीतिक परिदृश्य उपर से लेकर नीचे तक है । यही कारण है कि दरबारी किस्म के लेखको की तो बन आती है सरकार किसी की हो किसी का भी राज हो बस उसे तो रागदरबारी बनकर गुणगान ही गाना है । यही लोग है जो जमीनी नेता बनाते है भूमीपुत्र बनाते है किसान नेता बनाते हैं दलित नेता बनाते है आदिवासी नेता बनाते हैं इन्ही मे से आगे चलकर किसान नेता भी दिखाई देता है । फिर किसी को भैय्या किसी को दीदी भाभी यह पारिवारिक रिश्ते बनाने मे इनकी महारत हासिल रहती है । जबकि हालात ऐसे रहते है कि कोई इन तथाकथित दीदी भैया से मिलने चला गया तो मुलाकात कैसे होती है यह उसके लिए न भूलने वाली बात हो जाती है । पर इन लेखको की और पत्रकारिता वालो की खासियत यह है कि यह तब तक ही आसीन रखते है जब तक यह सत्ता में रहते है । इनकी बिरादरी ने तो एक नेता को मामा तक बना दिया। इस तरह के लेखको ने उपर से भाग्य लिखवाकर लाया हुआ है। इन पर सत्ता का वरदहस्त हर समय बना रहता है। इन पर लक्ष्मी जी कृपा हर समय बनी रहती है । किसी का स्थानांतरण हो सर्विस लगवाने हो यह सबसे अच्छी सीढियां भी बनते है । यही कारण है कि कई घोटालों मे इनके नाम भी आ जाते है । इस तरह के लोगों की संख्या ज्यादा रहती है यह इनके लिए व्यवसाय है तो इन लोग अपने माई-बाप स्थायी नहीं बनाते । कुछ नहीं इनका मानना है कि जिधर दम उधर हम । वहीं कुछ लोग किसी विचारधारा के प्रतीक बनते है । यही कारण है कि ऐसे लोगों को भी विचारधारा सामन्जस्य होने के कारण भी बहुत कुछ मिलता है। पर इन लोगों के साथ तकलीफ यह है कि इनके लिए जनमत मायने नहीं रखता। वहीं यह लोग दूसरों के विचारों को शुरू से ही खारिज करने मे लगे रहते है । यह लोग मूलतः असहिष्णु होते है । मोदी जी के आने के बाद यह लोग ज्यादा मुखर हो गये है । यही कारण है कि इन्हे एवार्ड वापसी गैंग तक नाम दे दिया गया है। हालांकि अभी तक किसी ने लौटाया नहीं है । पर धमकी लगातार जारी रहती है । पर इनकी खासियत है यह अपनी प्रतिबद्धता छुपाते भी नहीं है। अब उन लेखकों की बात करू जो तटस्थ रहते है । अपने काम से काम सही है तो सही है गलत है तो गलत है। यह ऐसे लोग होते है इन्हे इसी सच्चाई के कारण इनके विचारधारा वाले भी इन्हे अपना दुश्मन समझते है। सत्ता की चकाचौंध से इन्हे विरोध का स्वर बर्दाश्त नहीं होता। हर नेता की खासियत रहती हैं कि खुद कुछ नहीं कहेंगे अपने रोष को अपने इर्द-गिर्द घुमने वाले चमचो से संदेश जरूर भेजवा देते है। यही कारण है कि कुछ कर्तव्य निष्ठ पत्रकारों को जान तक गंवाने पडीं है। पर ऐसे पत्रकार व लेखक फककड ही रहते है । यही कारण है कि इन्हे तब तक ही अपना समझा जाता है जब तक सामने वाले का विरोध होते रहता है पर इनके समय हिट लिस्ट में आ जाते है। यही कारण है कि ऐसे कभी-कभी भाजपायी तो कभी-कभी कांग्रेसी दिखने लगते है । सत्यता यह है कि इनके यह कलम के रूप होते है । यही कारण है कि इस देश की हमारी पीढ़ी ने उन लेखकों को पढा जो सत्ता के गलियारों के लिए लिखते थे उनके लिए इतिहास बनाने का काम करते रहे । इसी कारण महाराणा प्रताप अपने ही देश में अपनी वीरता अपने जुझारूपन व घास की रोटी तक जिसने खाई उससे देश अपरिचित है जो अपने भूमि के लिए लडा वो कुछ तथाकथित लोगों के लिए खलनायक बन गया पर हमे अकबर महान पढाया गया । जिन लोगों ने स्वतंत्रता के लिए अहिंसक आंदोलन चलाया उसे पूरा देश जान रहा है पर जो क्रांतिकारी हुए देश के लिए शहीद हो गये उनके नाम तक देशवासियों को नहीं मालूम है। यह लिखने की कला है और समय देखकर मलाई खाने की कला है झूठ ऐसा परोसा जाता है कि सच भी शर्म से पानी पानी हो जाता है । कुल मिलाकर लेखको का कितना अहम रोल रहता है इस पर मैंने चर्चा की । बस इतना ही
डॉ. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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