आज गणेश चतुर्थी है और हम सबके गणपति बापा विराजेंगे आप सबको बहुत-बहुत बधाई । स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने लोगों मे जागरूकता लाने के लिए सार्वजनिक गणेशोत्सव की स्थापना की । इस आयोजन के पीछे स्वाधीनता के लिए एक जगह इकट्ठा होने का उद्देश्य माध्यम था । फिर यह परंपरा पूरे देश मे मनाने जाने लगी । ऐसा नही है कि उद्देश्य खत्म हो गया । रायपुर मे कुछ गणेशोत्सव मे भाषण और वादविवाद प्रतियोगिता का आयोजन होने लगा । वहीं गणेश पांडाल के माध्यम से जागरूकता पैदा करना भी मकसद होने लगा । समय समय पर विषय उस परिस्थितियो के अनुसार होने लगे । अभी तक विशाल काय मूर्ति रखी जाने लगी जो भव्यता प्रदान करती थी । इस कोरोना के समय मे आयोजन कर्ता शासकीय निर्देशों का पालन करते हुए आयोजन कर रहे है । पर इसके आयोजन मे लोग तन मन धन से जुटते है । इन आयोजनों में ” लाल बाग का गणपति ” उसकी विशाल काय मूर्ति दर्शन के लाभ के लिए लोग घंटों लाइन मे खडे रहते है । लोगों का मानना है कि बापा उनके हर मनोकामना को पूरा करेगा । इसीलिए मंगलमूर्ति मोर या का उद्घोष हर समय सुनाई देता है । वैसे ही पूणे के ” दगडू सेठ ” गणेशोत्सव की भी अपनी परंपरा है । गणेश जी की आरती में ” बांझन को पुत्र दे तो ” का उल्लेख है । दगडू सेठ को पुत्र रत्न की प्राप्ति के कारण ही उनहोंने पूणे के तुलसी बाग स्थित यह गणेश अपने मनोरथ के लिए दान करके बनवाया जो प्रसिद्द है । यही कारण है कि दूसरे धर्मों के लोग भी यहां जाते है । यह भी है गणेश जी को बहुत ही धूम-धाम से नाचते गाते हुए आकर्षक ढंग से लाया जाता है । मैंने देखा है हर जगह की परंपरा भाषा का आयोजन मे समावेश दिखता है । लोग अपने स्थानीय भाषा व परंपरा के अनुसार ही पूजा पाठ और बाकी के कार्यक्रम करते है । हर शाम नया कार्यक्रम और मिलने जुलने का एक अवसर लोगों को मिलता है । पिछले कुछ सालों पहले रायपुर में अमरनाथ का सीन बनाया गया था । कहतें हैं हूबहू अमरनाथ लग रहा था । जिन्हे यह देखने को नहीं मिला इसके माध्यम से सौभाग्य प्राप्त हुआ । यही गणेशोत्सव है जब लोगों ने सामाजिक राजनीतिक चर्चा इसके माध्यम से आयोजित हुई वहीं शास्त्रीय संगीत की भी बैठक हुई । वहीं सुगम संगीत जिसमे लोगों ने रायपुर संगीत पैराडाइज संगीत राजनांदगाँव के राज संगीत वहीं भिलाई की प्रसिद्ध गायिका मंजूला दास गुप्ता को भी इस क्षेत्र के लोगों ने भी सुना । वहीं स्थानीय कवि सम्मेलनों में लोगों ने स्व. पवन दीवान जी स्व. लक्ष्मण सिंह जी मसतूरिया स्व. बसंत जी दीवान श्री रामेश्वर बैषणव जी आदि के कवि सम्मेलन रात को आपकों उठने तक नहीं देते थे । ऐसी महफिल बांध कर रखते थे । यह दस दिन कैसे निकलते हैं पता भी नहीं चलता विसर्जन का समय आ जाता है । यही कारण है कि विसर्जन भी भव्यता ली हुई रहती है । इस समय बडे बडे संदेश देते हुए विसर्जन की झांकीया बनाई जाती हैं । इस मामले में राजनांदगाँव की झांकीया इस अंचल में बहुत प्रसिद्ध है । यही कारण है कि विसर्जन रात भर चलता है लोगों का उत्साह खत्म होने का नाम नहीं लेता । यही कारण है कि संस्थाओं ने स्थल व झांकीयो मे प्रतिस्पर्धा रहती है । यहां काफी समय से महाकोशल इस पर आयोजन काफी सालो से करते आ रहा है । यही कारण है कि विसर्जन मे भी ” मंगलमूर्ति मोरया पुढच्या वर्षी लवकर या ” का शंखनाद व उदघोष बापा जी के लिए कहा जाता है । निश्चित यह हर साल का आयोजन सुख की अनुभूति लेते हुए आता है । अंत मे गणपति बापा मोर या भगवान सबका भला करे बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ
Web title – Ganeshotsav was the objective medium to gather a place for freedom



