विशेष लेख – कोरोना मे भी वर्ग भेद – डॉ. चंद्रकांत रामचंद्र वाघ
मैंने जात मे फर्क होते देखा है । मैंने धर्म मे फर्क होते देखा है । मैंने आर्थिक स्थिति मे फर्क होते देखा है । मैंने लोगों के अमीर गरीब मे सबसे बड़ा फर्क होते देखा है । पर मै आश्चर्य चकित हू कि बिमारियों ने भी अपनी आदमियो की फितरत की तरह बिमारियों ने भी फर्क दिखाया है । विगत चार पांच महीने से कोरोना के बारे में देश लाॅकडाउन के हर चरणों को देखा है । वहीं अनलाॅकडाउन भी देखा है । पूरा देश इस बिमारी से लड़ने के लिए अपने अपने तरफ से लगे हुए हैं । जागरूकता भी काफी आई है । पर आज के समाचार ने कोरोना ने बिग बी अभिताभ बच्चन के परिवार जिसमे अभिषेक बच्चन ऐश्वर्या राय बच्चन आराधना बच्चन के समाचार से आज दिन भर पूरे चैनल अभिताभ जी के समाचार से भरे हुए थे ।
उल्लेखनीय है कि लोगों ने महानायक के लिए पूजा अर्चना की जो स्वागत योग्य हैं । पर मेरे को तब इन लोगों पर नाराजगी आती है जब ये लोग किसी के यहां कोरोना पाजिटिव पाये जाने पर बहिष्कार जैसे कर देते है। और तो और इनकी हिम्मत जब कोरोना पेशेंट को ले जाते समय यह लोग फोटो लेने और वीडियो बनाने से बाज नहीं आते । अभिताभ जी के पहले करीब आठ लाख पचास हजार लोग संक्रमित हुए हैं किसी ने इनके लिए चिंता जाहिर की ? होम हवन पाठ तो छोडो ठीक होने के लिए प्रार्थना भी नहीं की होगी।
हालात यह है इसके संक्रमण से लोग गुमनामी से आते है गुमनामी से जाते है। अब तो शासन को भी सोचना पड रहा है कि जो बंदा देश को कोरोना फैलने से बचने का संदेश दे रहा है जो ब्रांड ऐंबेसडर है वो और उसका परिवार कोरोना से संक्रमित हो सकता है जबकि इन लोग इससे बचने के पूरे ऐहितायत बरतने के बाद भी संक्रमित हो जाए तो यह कोई मामूली बात नही है । इसलिए सरकार भी अपनी रणनीति पर पुनः कुछ नया सोच रही होगी । पर यह तय है कि इस खबर से आम आदमी भी चिंतित तो हुआ है कि इससे अब और क्या सुरक्षा के बारे में कदम उठाये जाए।
जिस तरह से यह फैल रहा है अब तो हालात यह हो गए हैं कि कल तक लाॅकडाउन का विरोध करने वाले भी लाॅकडाउन के हिमायती बनते जा रहे हैं । आज जिससे मिलो वो यह कहते नजर आते है कि पुनः पहले जैसे लाॅकडाउन की सख्त आवश्यकता है । लोग मानसिक रूप से इस हालात के लिये पूर्ण रूप से तैयार है । देश की आम जनता को यह समझ में आ गया है कि इस बिमारी से लड़ने के लिए दूसरा और कोई विकल्प नहीं है । सावधानी से रहने के बाद भी यह स्थिति है ।
एक चिकित्सक के नाते मुझे यह लगता है कि देश भर मे दो लाॅकडाउन होने से हम इसको नियंत्रित करने मे सफल होंगे । महानायक जी के इस बिमारी से ग्रसित होने से पुनः एक बार नये सिरे से देश को सोचने के लिए मजबूर तो होना पडा है । वहीं यह फर्क भी महसूस हो रहा है कि संवेदनाओ के लिए भी सोच और मापदंड अलग है । क्योकि एक आम आदमी इस बिमारी से लडकर महानायक तो बनता है पर हम लोग उसे तवज्जों नहीं देते है क्योकि उसकी वो हैसियत नहीं है, जबकि वो मामूली संसाधन से अपने को इस बिमारी से बाहर निकालता है। वह अमिताभ जी के हर किरदार को निभाता है चाहे दीवार हो, जंजीर हो, मजबूर हो, शहंशाह हो या आनंद पर इस पर किसी का ध्यान तक नहीं जाता ।
मेरा यह आलेख उन गुमनामी के अभिताभ बच्चनो के लिए है जिन्होने कोरोना को पराजित किया तथा इस मुश्किलात में आर्थिक परेशानियों के बावजूद अपने परिवार के फर्ज को निभाया । ऐसे जज्बे को सलाम । बस इतना ही डा .चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




