छत्तीसगढ़

पूर्व सीएम डॉ. रमन ने सरकार पर लगाए पीडीएस भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र


पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन आवंटन में राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। डा. सिंह ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर पीडीएस घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

पूर्व सीएम ने आरोप लगाते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ के गरीबों की थाली से चावल चुराने वाले दाऊ भूपेश बघेल का भ्रष्टाचार उजागर हो चुका है। प्रदेश में हुए 68,900 मीट्रिक टन चावल घोटाला हुआ है। CBI जांच से भ्रष्टाचारियों की हकीक़त सामने आएगी।

पीयूष गोयल को लिखे पत्र में डा. रमन ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भ्रष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में कार्य कर रही है। वहीं छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन आवंटन में शासन का बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। राज्य निर्माण के बाद भुखमरी और कुपोषण से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों की भाजपा सरकार ने पीडीएस के माध्यम से एक जनहितकारी और सुचारू नीति का निर्माण किया था।

इस पीडीएस में प्रदेश के गरीब परिवारों के लिए 1 रूपये किलो चावल, निशुल्क नमक और चना की नीति शामिल थी और इस पीडीएस को देश की सर्वोच्च न्यायालय ने आदर्श पीडीएस बताया था लेकिन पिछले साढ़े 4 सालों में यह परिस्थिति पूरी तरह से विपरीत हो चुकी है और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार द्वारा पीडीएस में एक बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है।

भाजपा शासनकाल में पीडीएस की पारदर्शिता के लिए खाद्य विभाग का सॉफ्टवेयर बनाया गया था। इसके माध्यम से प्रदेश की सभी राशनदुकानों के कुल कार्ड के आधार पर हर माह 100 फीसदी कोटा जारी किए जाने का प्रावधान बनाया गया था। इस सॉफ्टवेयर में M1+M2-M3 (M1= पहले महीने का पूरा राशन), (M2= दूसरे महीने का पूरा राशन), M3 = (दो महीने में बिक्री के बाद बचा राशन) का फार्मूला अपनाया गया था।

उन्होंने लिखा है कि इस प्रक्रिया में तीसरे महीने, बीते दो महीनों के बचे हुए कोटा को घटाकर शेष कोटा देने पारदर्शी व्यवस्था थी। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सभी राशनदुकानों से कंप्यूटराइज्ड घोषणा पत्र लिया जाता था, जिसमे उस राशन दुकान के बचे कोटा, प्राप्त हुए कोटा, बिक्री किये कोटा और बचे हुए कोटे की जानकारी होती थी।

इसके उपरांत फ़ूड इंस्पेक्टर अपने मॉड्यूल से ये जानकारी संचालनालय (Directorate) को हर महीने भेज देते थे, जिसके आधार पर बचे कोटे को घटाकर शेष कोटा दिया जाता था। ये घोषणा पत्र विभाग के सॉफ्टवेयर के जनभागीदारी पोर्टल में दिखता था, लेकिन कांग्रेस के शासन में उक्त व्यवस्था का पालन नही किया गया। हर महीने राशन दुकानों को पूरा कोटा दिया जाता रहा और जिन कार्डधारकों ने कोटा नहीं लिया वह बचता गया।



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