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तो क्या बंद हो जाएगा भिलाई स्टील प्लांट, कई यूनिट ठप्प, जानें मुख्य वजह


छत्तीसगढ़ में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड ध्वज वाहक इकाई भिलाई स्टील प्लांट को एक बार फिर कोल संकट से जूझना पड़ रहा है। जिससे उत्पादन पर असर बड़ा असर पड़ रहा है। स्टील उत्पादन के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ईंधन कोल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन ठप्प हो गया है। संयंत्र की कुछ मिलों को रोक दिया गया है। बीएसपी के पास अब सिर्फ दो दिन का ही कोयला शेष रह गया है। लेकिन आइए आपको बताते है कि इस कोल संकट का मुख्य कारण क्या है।

भिलाई इस्पात संयंत्र में कोल संकट का सबसे बुरा असर संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस पर पड़ रहा है। कोयले के कमी के चलते दो ब्लास्ट फर्नेशो को डाउन करके चलाया जा रहा है। बीएसपी प्रबंधन ने ब्लास फर्नेस-6 को 12 घंटे के लिए डाउन करने का फैसला ले लिया है।

गुरुवार को ब्लास्ट फर्नेस-8 महामाया को भी डाउन करने की तैयारी है। इसके बाद फर्नेस-4 व 5 को चंद घंटों के लिए डाउन किया जाएगा। ब्लास्ट फर्नेश डाउन होने की वजह से उत्पादन लगभग आधा हो गया है।

भिलाई स्टील प्लांट-बीएसपी के पास वर्तमान में दो दिन का ही कोल स्टाक बचा है। बीएसपी को प्रतिदिन 12500 टन कोयले के आवश्यकता पड़ती है। वर्तमान में करीब 30 हजार टन ही कोल स्टॉक में बचा है। भिलाई इस्पात संयंत्र की रोलिंग मिल को बुधवार दोपहर 12 बजे से बंद कर दिया गया। जिस वजह से रेल मिल, मर्चेंट मिल, वायर रॉड मिल को ईंधन नहीं मिल पा रहा है। इन मिलों के फर्नेस को चलाने के लिए हॉट एयर की आवश्यकता होती है। गैस की कमी के चलते मिल को बंद किया गया है।

दरअसल जुलाई माह में आस्ट्रेलियन कोल मालवाहक शिप के जरिए विशाखापट्टनम पहुंच चुका है। लेकिन विसाखापट्टनम से भिलाई तक कोयला लाने के लिए रेलवे रैक उपलब्ध नही करा रहा है। इसके साथ ही रेलवे ट्रैक में ट्रैफिक को इसकी वजह बताई जा रही है।

वहीं कोक ओवन के कर्मचारियों का कहना है भिलाई संयंत्र में लगभग 80 प्रतिशत आस्ट्रेलियन कोक का इस्तेमाल किया जाता है। सिर्फ 10 प्रतिशत इंडियन कोक इस्तेमाल होता है। बीएसपी के जनसम्पर्क उप महाप्रबंधक प्रशांत तिवारी का कहना है कि भारतीय रेलवे कोयले के परिवहन के लिए रैक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। जिसकी वजह से कोयला की ढुलाई प्रभावित हो रही है।





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