गरियाबंद- जिला पंचायत सामान्य सभा में हंगामा, सदस्यों ने बैठक का किया बहिष्कार – cgtop36.com

भूपेंद्र गोस्वामी गरियाबंद – जिला पंचायत सामान्य सभा की आज मंगलवार को हुई बैठक काफी हंगामेदार रही। हंगामा इतना बढ़ा कि कुछ जिला पंचायत सदस्य बीच मे ही बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल आए। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष इससे इत्तेफाक नही रखती और सबकुछ आल इज वेल होने का दावा कर रही है। वही जिला पंचायत सीईओ ने जनप्रतिनिधियों का आपसी मामला होने की बात कहकर खुद को किनारे कर लिया।
60 लाख को लेकर हंगामा
दरअसल ये पूरा हंगामा 60 लाख के बंटवारे को लेकर हुआ है। जिले को जिला विकास निधि की दूसरी क़िस्त के तौर पर यह रकम जारी हुई है। जिसे जिला पंचायत जनप्रतिनिधियों के द्वारा जिले के विकास में खर्च किया जाना है। इसी राशि के बंटवारे को लेकर ये हंगामा हुआ है।
कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने बंटवारे पर जताई नाराजगी
जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक में उक्त राशि का बंटवारा होना था। जब बंटवारा हुआ तो अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभापतियों को छोड़कर बाकी बचे ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य बंटवारे से नाखुश नजर आए। नाराज जिला पंचायत सदस्यों ने राशि के बंदरबांट का आरोप लगाते हुए बैठक में हंगामा किया और फिर बैठक बीच मे ही छोड़कर बाहर निकल आये।
नाराज सदस्यों का आरोप
जिला पंचायत सदस्य चन्द्रशेखर साहू और रोहित साहू ने मीडिया को बताया कि जिला विकास निधि की 60 लाख की राशि जारी हुई है। जिसमे से अध्यक्ष ने अपने क्षेत्र के लिए 20 लाख, उपाध्यक्ष को 10 लाख, सभापतियों को 5-5 लाख और बाकी बचे सदस्यों के इलाको के लिए 2-2 लाख की राशि आबंटित की है। जिससे वे संतुष्ट नही हुए और अपना विरोध जताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
अध्यक्ष ने कहा आल इज वेल
वही जिला पंचायत अध्यक्ष स्मृति नीरज ठाकुर नाराज सदस्यों के दावों से इत्तेफाक नही रखती। उन्होंने कहा कि सभी जिला पंचायत जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक राशि का आबंटन किया गया है। यही नही उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि ने बैठक का बहिष्कार नही किया। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि बैठक समाप्त होने तक वहां मौजूद रहे। उन्होंने सबकुछ आल इज वेल होने का दावा किया है।
जिला सीईओ ने किया किनारा
जिला पंचायत सीईओ रोक्तिमा यादव से जब मामले को लेकर जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया कि उक्त राशि का आबंटन बहुमत के आधार पर जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। इसलिए आबंटन में उनका कोई हस्ताक्षेप नही रहता।




