Ukraine Russia War- पाकिस्तान के छात्र भी सुरक्षित रहने तिरंगा हाथ मे लेने को हुए मजबूर – cgtop36.com

डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर यूक्रेन के कारण जो हालत बने हुए है वहां पर शिक्षा के लिए गये छात्रो पर बात की जाए । विगत तीन चार दशको से यह ट्रेंड सा बन गया था की अगर बच्चे का यहां के चिकित्सा महाविद्यालय मे नही होता है तो बच्चो के लिए यह भी एक विकल्प के तौर पर बहुत आकर्षक रूप से उभरा । बाद मे तो कुछ लोगो ने तो प्रवेश के लिए इसका व्यापार सा भी बना लिया । यह भी उतना ही कटु सत्य है की यहा जाने वालो मे अधिकांश लोग उच्च मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा रहते है । वहीं कुछ अपने सपने कुछ बच्चे के सपने को पूरा करने के प्रयास मे यह लोग इस मायाजाल का अंग बन जाते है । पर इस देश मे जो ज्यादा मेंघावी रहते है वह तो अपने प्राविणय सूची मे नाम बना लेते है । फिर वह भी लोग सफल हो जाते है जिनके पास आरक्षण की बैसाखी मौजूद रहती है । तीसरे वह लोग जिनके पास यह दोनो नही रहता है पर मुद्रा रहती है वह लोग भी इसके बल पर ही देश के नेताओ के प्रायवेट मेडिकल कालेज से महंगी चिकित्सका शिक्षा लेकर चिकित्सक बन जाते है । इस चिकित्सकीय शिक्षा का हिस्सा बना लेते है । पर कुछ लोग ऐसे है जिनके पास पैसा तो है पर पर्याप्त नही है तो फिर यह लोग इस शिक्षा के लिए विदेश का रूख कर लेते है । पर वहां भी इन्हे दो बातो पर तो सामान्य रूप से झूझना पडता है पहला लैंग्वेज और दूसरा वहां का विपरीत पर्यावरण। जैसे कहा जाता है एक लैंग्वेज का भी विषय शामिल रहता है । छात्रो को वहां पर रहकर पहले अपने को ढालना भी पडता है । फिर चतुर्थ व अंतिम श्रेणी जिनके पास यह सब नही है पर चिकित्सक भी बनना है तो लोगो के तकियानुसार वह फिर झोलाछाप आयुर्वेद होम्योपैथिक की तरफ रूख कर लेते है । पर आज बात विदेश मे अध्ययन करने गए बच्चो की बात हो रही है तो मै उसी मे ही अपने को फोकस करूंगा वहां से कोर्स पूरा करने के बाद आने के बाद फिर एक और मानसिक परेशानी की यहां पर व्यवसाय करने के लिए इंट्रेनस एक्जाम देकर क्लीयर करना । पर यह बहुत ही कठिन प्रक्रिया है जिसमे कुछ बच्चो के साल भी जाया हो जाते है । मै नाम नही लिखूंगा मेरे मित्रो के भी बच्चे गये थे उसमे से मेरे एक मित्र ने इस परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध मे लिखने के लिए कहा था । पर बात आई गई होगी । मेरे एक दूसरे मित्र ने भी अपने लडके के पास होने के लिए भगवान से मुझे दुआ मांगने की बात की । यह शासकीय प्रक्रिया इसमे कोई भी सुझाव व हस्तक्षेप मायने नही रखते । फिर यह तपकर बालक व्यवसाय मे कदम रख पाते है । इसके बाद भी शायद इनकी विशेषज्ञता पर आज भी स्पष्ट दिशा निर्देश का अभाव है । शायद न्यायालय मे मामले लंबित भी है । यूक्रेन के बाद सरकार क्या करे यह भी एक यक्ष प्रश्न है । क्योंकि आज यूक्रेन कल कोई दूसरा देश भी हो सकता है वहां की अस्थिरता यही हालात पैदा कर सकते है । सरकार या तो मेडिकल कॉलेज बनाये पर जिनका तब भी नही हुआ तो यह लोग तो पुनः जाते मिलेंगे । कुल मिलाकर यह ऐसा चक्रव्यूह है जिसका उत्तर किसी के पास नही है । पर ऐसे हालात के बाद अभिभावक भी भेजने के पहले अब तो दो बार जरूर सोचेंगे । मै मोदी जी की तारीफ नही कर रहा पर सरकार को जरूर साधुवाद देना होगा जिनकी दृढता के चलते यह छात्र अपने तिरंगे के नीचे सुरक्षित सकुशल अपने घर को लौटकर आ पा रहे है । सिर्फ एक छात्र की दुखद मृत्यु से देश को भी रूबरू होना पडा है । जैसे समाचार आ रहे है अमेरिका ब्रिटेन जैसे देशो के नागरिक भी नही निकल पाए है वही पाकिस्तान के छात्र भी वहां अपने को सुरक्षित रखने के लिए तिरंगा हाथ मे लेने को मजबूर हुए है । यह अलग बात है वीसा की अनिवार्यता ने उन्हे रोक दिया । भारत सरकार की बच्चो को निकालने की योजना आपरेशन गंगा बिल्कुल अपने नाम अनुरूप अविरल बह रही है । हमारे सभी छात्र सकुशल मोदी जी के नेतृत्व व हमारे चार काबीना मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया श्री कीरण रिजिजू श्री पूर्व जनरल वी के सिंह श्री हरदीप पुरी जी है । सभी लोगो ने अपना काम बखूबी किया । इसके लिए मोदीजी का ही नेतृत्व है जिसमे हमारे भारतीय नागरिक सुरक्षित है । पर यह तय है अब बाहर जाकर पढने मे निश्चित कमी आएगी ।
बस इतना ही
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




