विशेष लेख – गांधीवाद और धर्मनिरपेक्षता, डॉ. वाघ की वाल से

डा. वाघ की वाल से आज अपनी बात पर चलो आज गोडसे वाद और गांधीवाद पर कुछ बात हो जाए । कुछ दिनो पहले ही एक कार्यक्रम मे काश्मीर की पी.डी. पी नेता महबूबा मुफ्ती का बयान आया । यह बयान काश्मीर मे लगे तीन सौ सत्तर धारा व पैंतीस ए को लेकर था ।इस बयान को बयान देश को देखने की आवश्यकता है ।महबूबा मुफ्ती ने कहा की हम तीन सौ सत्तर हटने के पहले गांधी जी के भारत मे रहते थे अब तीन सौ सत्तर हटने के बाद हम गोडसे के भारत मे रह रहे है । महबूबा मुफ्ती जी आपने बहुत सही कहा । इस व्यक्तवय पर तथाकथित गांधीवादी नेताओ के मुंह मे दही जम गया है वही धर्मनिरपेक्ष दलो की चुप्पी ने इनके दोगलापन को उजागर कर दिया है । चलो आज इनके वाद पर ही चर्चा की जाए और इनके वाद की सत्यता भी सामने लाई जाए। चलो तीन सौ सत्तर धारा के हटने के पहले के उस तथाकथित गांधीवाद पर ही चर्चा की जाए। अगर यह धारा जब नही हटी थी तो गांधी का भारत गांधी का काश्मीर था । महबूबा मुफ्ती ने बिल्कुल सही कह रही है । इस देश के बहुसंख्यक लोगो का निर्ममता से 1947 मे भी पूर्वी पाकिस्तान से लाखो लोगो को मारा गया था भगाया गया था तब भी गांधी का ही भारत था । वैसे ही जब 1990 के आसपास जब इस देश के गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सइद भी काश्मीर से थे इसके बाद भी ये जब जो हुआ पूरे देश ने देखा । जनवरी 1990 मे पूरे काश्मीर मे जिस तरह से काश्मीर पंडितो नरसंहार हुआ उनके साथ बलात्कार हुआ पूरी घाटी पंडित विहीन कर दी उनको अपने ही घर से विस्थापित कर दिया गया तो यह उस समय का भारत व उस समय का काश्मीर गांधीवादी था तो यह फिर शर्म की बात है । फिर यह गांधीवाद की अगर घूंटी हमे आजादी के बाद से पिलाई जा रही थी तो इन दलो ने नेताओ ने हम बहुसंख्यक के साथ अपना हित साधने के लिए एक राजनीतिक छल किया है । वही उनका यह कहना की धारा तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए हटने के बाद भारत गोडसे का भारत और काश्मीर गोडसे का काश्मीर हो गया है तो यह धारा हटाने के बाद वहा के अल्पसंख्यक लोगो की सुरक्षा और पुनर्वास वही आतंकवादियो का एनकाउंटर गोडसे का भारत है तो मुझे कही भी झिझक नही है की मुझे क्या देश के हर नागरिक को आज का काश्मीर भारत ही पसंद आएगा जो गोडसे का है । एक आम नागरिक जो एन डी ए के शासन काल मे आतंकवाद की घटनाओ से सुरक्षित है तो फिर गोडसे के भारत से ही प्यार करेगा । अब यह तथाकथित दल व नेता बताए की उक्त नेता की कौन सी बात सही है । पर मोदी जी को घेरते घेरते इन लोगो ने शायद गांधीवाद का सच देश को बता दिया । जिसको कोई भी परिभाषित नही कर पाया था । पिछले कुछ दिनो से बहस मे भी अपने को धर्मनिरपेक्ष तथा इनके नेता बहस मे जब तक गोडसे आतंकवादी का नाम नही लेते न तब तक उनकी बहस पूरी होती है न खाना पचता है । गोडसे ने तो गांधीजी की हत्या की जो गलत है पर इतिहास मे मोहम्मद गजनवी ने सत्रह बार सोमनाथ को लूटा हत्याऐ की बाबर ने भी वही किया औरंगजेब ने तो शासन के लिए अपने पिता को जहा कैद किया अपने भाइयो तक को मरवा दिया । वही मंदिर तोडे गुरू तेगबहादुर के बच्चो को चुनवा दिया वही गुरू को शहीद कर दिया जिसके नाम से ही दिल्ली मे शीशगंज है । क्या कभी किसी ने इन्हे आतंकवादी कहां ? इनके बारे मे यह धर्मनिरपेक्ष लोग कभी कुछ कहते है । पर महबूबा ने जिस गोडसे के भारत की बात की इस देश को यही भारत चाहिए था चाहिए है और चाहिए रहेगा ।
बस इतना ही ।
डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




