
गिरिश गुप्ता गरियाबंद में पदस्थ रहे दो एसपी और एक एएसपी का तबादला जिले में स्थित एक बांध में डुबकी लगाने के तुरंत बाद हो गया। अहम बात ये है कि 5 साल के अंतराल में जब भी इन अधिकारियों ने डुबकी लगाई उस समय एक शख्स भी उनके साथ मौजूद रहा। अब इसे संयोग कहे या फिर कोई दैवीय शक्ति, लेकिन यह बात सोलह आने सच है क्योंकि खुद इस घटना का शिकार हो चुके अधिकारी ने इसका खुलासा किया है।
एएसपी सुखनंदन राठौर ने अपने विदाई समारोह में इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जिस दिन उनका ट्रांसफर ऑर्डर जारी हुआ उस दिन सुबह उन्होंने अपने स्टॉफ के साथ तोरेंगा बांध पहुंचकर डुबकी लगाई थी और उसी शाम उनका ट्रांसफर ऑर्डर आ गया।
श्री राठौर ने बताया कि कुछ माह पहले ही जिले के तत्कालीन एसपी भोजराम पटेल ने भी इस बांध में डुबकी लगाई थी, उसी दिन उनका भी तबादला हो गया था। यही नही कुछ साल पहले जिले में पदस्थ रहे एसपी जितेन्द्र मीणा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जिस दिन उन्होंने तोरेंगा बांध में डुबकी लगाई थी उसी दिन उनका भी जिले से रवानी का आदेश जारी हो गया था।
एएसपी राठौर ने बताया कि इन तीनों घटनाओं में दो बातें कॉमन है। एक तो बांध में डुबकी लगाने वाले दिन ही तबादला हुआ और दूसरा तीनो अधिकारियों के साथ एक ही टीआई मौजूद था। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे क्या कारण है यह उन्हें नही मालूम लेकिन यह बात पूरी तरह सत्य है
डुबकी लगाने के दौरान तीनो तबादला हुए अधिकारियों के साथ जो टीआई मौजूद रहे वह अभी भी जिले में ही पदस्थ है। सुनने में आया कि अब अधिकारियों में यह चर्चा आम हो चली है कि यदि उनका ट्रांसफर नही हो रहा है तो उक्त टीआई के साथ तोरेंगा बांध में डुबकी लगाओ और शाम तक ट्रांसफर पाओ।
इन मामलों में ऐसी किसी दैवीय शक्ति होने की बात से इत्तफाक नही रखता और ना ही एएसपी सुखनंदन राठौर ने ऐसा कोई विश्वास जताया है। उन्होंने केवल घटनाओं को साझा किया जो संयोगवश एक ही कड़ी में पिरोई नजर आ रही है।




