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मनरेगा-बाड़ी विकास से संवरने लगी किसानों की जिंदगी

जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड सक्ती के ग्राम नंदौरखुर्द गांव में रहने वाले 7 किसानों ने मनरेगा के तहत अपनी बंजर भूमि को बाड़ी बनाकर सब्जी उत्पादन कर अपनी आमदनी बढ़ा ली है। बाड़ी विकास से मनरेगा के तहत श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिल रहा है। नदौरखुर्द के मेहनतकश किसान फादलराम, रामचरण राठौर, लालसहाय, मनीराम राठौर, कृष्णकुमार राठौर, हेतराम राठौर, और चुन्नीलाल अब सब्जी-भाजी उत्पादन से मिल रहे लाभ से प्रोत्साहित हुए हैं। किसानों के लिए मनरेगा संजीवनी साबित हुई है।

किसानों ने बताया कि उनके पास जमीन होने के बाद भी इन मुनाफा नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि जमीन भाठा बंजर होने के कारण खेती एवं सब्जी-भाजी उगाने के लायक नही थी। उनकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि वे अपना पैसा लगाकर सब्जी-भाजी के लिए जमीन तैयार कर सकते। महात्मा गांधी नरेगा के रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक ने इन किसानों को मनरेगा के तहत बाड़ी विकास योजना की जानकारी दी। निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके खेत में सब्जी बाड़ी लगाने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिली। किसानों ने मई 2021 में सब्जी-भाजी बोने का काम कराना शुरू कर दिया। किसानों को मनरेगा से बाड़ी विकास का कार्य करने का मौका मिला और श्रमिकों को गांव में ही मजदूरी भी मिली।

किसानों की 30 से 50 डिसमिल जमीन पर छोटी-छोटी क्यांरियां तैयार की गई। क्यारियां तैयार होने के बाद किसानों ने लाल भाजी, कांदा भाजी, भाठा, मुनगा, बरबटी, लौकी, तुराई, टमाटर, मिर्ची, धनिया पत्ती आदि लगायी।इस प्रकार किसानों ने सब्जियों का उत्पादन शुरू कर दिया। कठिन परिश्रम और उन्नत तकनीक का फल किसानों को मिलने लगा। वे सब्जियों को बाजार में बेचने लगे हैं। इससे किसानों की आमदनी बढ़ी और घर परिवार में खुशहाली का माहौल बनने लगा। किसान आमदनी बढ़ने से प्रोत्साहित होकर सब्जी-भाजी का उत्पादन बढ़ाने के लिए योजना बना रहे है। इन किसानों की प्रगति से अन्य भी खेती किसानी की तरफ रूचि ले रहे हैं।

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