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आदिवासी समाज के लोगों ने विधि-विधान के साथ की अपने देव की शादी, और दूल्हा जैसी ही दुल्हन को लेकर घर वापस लौटा तो जमकर बारिश हुईं पढ़े पुरी ख़बर

बालोद। आपने अब तक कई तरह की शादी देखी होगी. लेकिन हम आपको एक ऐसी शादी के बारे में बारे में बता रहे हैं, जिस पर आपके लिए मुश्किल होगा. जी हां, सावन माह के आखिरी दिन तक बारिश नहीं होने से आदिवासी समाज के 10 हजार से अधिक लोगों ने विधि-विधान के साथ अपने देव की शादी की, और दूल्हा जैसी ही दुल्हन को लेकर घर वापस लौटा जमकर बारिश होने लगी. देव के आशीर्वाद से सभी भावविभोर दिखे.

बालोद जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर कमकापार गांव में गोंड़ समाज के भीमादेव का मंदिर है. मान्यता है उसके आसपास के 7 गांव में कभी भी किसी तरह की समस्या आती है, तो सभी गांव के ग्राम प्रमुख भीमादेव के पास जाकर समाधान पूछते हैं. ऐसे में जब सावन माह के आखिरी दिन तक बारिश नहीं होने से परेशान सातों गांव के ग्राम प्रमुख कमकापार स्थित भीमादेव के दरवाजे पहुंकर देव का आह्वान किया. इस दौरान ग्राम प्रमुखों ने भीमादेव के बेटे की शादी करने का निर्णय लिया. 45 साल पहले भी जब क्षेत्र में बारिश नहीं हुई थी, और फसल सूखने लगी थे, तब बुजुर्गों ने इसी तरह की परंपरा निभाई थी, जिसे फिर से दोहराया गया.

सातों गांव के ग्रामीणों को पता चला कि उनके देव उनसे नाराज हो गये हैं, जिसके बाद सभी गांव के लोगों ने आपस में चंदा एकत्रित किया, और दूसरे ही दिन गाजे-बाजे के साथ आदिवासी रीति-रिवाज के साथ सारी रस्में निभाते हुए भीमादेव के बेटे की शादी सम्पन्न की. कमकापार स्थित भीमादेव मंदिर के पास दो अलग-अलग जगह दूल्हा और दुल्हन का मंडप सजाया गया. दूल्हे का परिवार पीड़ियाल गांव से था, तो वहीं दुल्हन का परिवार मुड़पार गांव से था. सबसे पहले तेल मायन की परंपरा हुई, फिर गाजे-बाजे के साथ सभी ने भाव-विभोर होकर नृत्य भी किया, और आखिर में दूल्हा-दुल्हन के घर बारात गया और जैसे ही दूल्हे के घर बारात वापस पहुंची तो जमकर बारिश हुई.

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