
रायपुर. राजधानी के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में संविदा भर्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संबंधितों पर अपने चहेतों को मौका देने का सीधा आरोप लग रहा है। कॉलेज में प्राध्यापक के एक व तीन विभागों के लिए एक-एक सह प्राध्यापक की भर्ती के लिए वॉक इन इंटरव्यू बुलाया गया था। इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। संविदा भर्ती का यह विवादित मामला अब बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसको लेकर पहले से शासकीय पदों पर जमे हुए कुछ प्राध्यापक व सह प्राध्यापकों के सूर बदले हुए हैं।
सहायक प्राध्यापक को लेकर हर महीने अस्पताल में भर्ती की जाती है, लेकिन आठ साल में एक बार भी अस्पताल में सह प्राध्यापक पद पर संविदा भर्ती नहीं की गई है। इधर अस्पताल के डीन का कहना है कि हर महीने सहायक प्राध्यापक संविदा भर्ती की प्रक्रिया चलती है।
इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि इस भर्ती को लेकर दो दिन पहले ही 26 जुलाई को नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अस्पताल के एक सहायक प्राध्यापक ने हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। साथ ही अस्पताल को लीगल नोटिस भी जारी किया। डॉक्टरों ने इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत भी शिकायत कर चुके हैं।
वहीं सहायक प्राध्यापक अस्थि रोग विभाग के डॉक्टर प्रणय श्रीवास्तव ने बताया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय मेंं नियमित रूप से कार्यरत हूं। मेरा प्रमोशन प्रक्रियाधीन है। मुझे सहायक अध्यापक के तौर पर 7 वर्षों तक का अनुभव है। फिर प्रमोशन नहीं दिया जा रहा है। नए व्यक्ति को भर्ती किया जा रहा है। नियम के तहत पुराने व्यक्ति को ही प्रमोट करना चाहिए।
अभी चिकित्सा महाविद्यालय में अस्थि रोग विभाग की संविदा की सह प्राध्यापक पद की नियुक्ति का वॉक इन इंटरव्यू का आयोजन किया जा रहा है। यह विज्ञापन व नियुक्ति असंवैधानिक है। उन्होंने बताया कि इस नियुक्ति के लिए 4 साल का सहायक अध्यापक का अनुभव पर्याप्त होता है। लेकिन यह नियुक्ति होने से मेरे कनिष्ठ मेरे से सीनियर हो जाएंगे। जो बिल्कुल गलत है।
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उन्होंने कहा कि सह प्राध्यापक पद में भर्ती होने से पद मुझसे सीनियर हो जाएंगे जो मेरी तरक्की में अवरोध उत्पन्न कर अन्यायपूर्ण होने के कारण हमेशा के लिए हतोत्साहित कर देगी। सामान्य प्रशासन में संविदा का नियम यह कहता है कि संविदा नियुक्ति तभी की जानी चाहिए, जब पदोन्नति के पद पर जब कोई योग्य रेगुलर कैंडिडेट उपलब्ध ना हो अथवा 1 साल के अंदर वह पद नहीं भरा जा सके।
वहीं शिशु रोग डॉक्टर ओंकार खंडेलवाल ने बताया कि नियुक्ति का विज्ञापन नियम के विरुद्ध है और असंवैधानिक है। इससे डॉक्टरों का हक मारा जाता है। इस नियुक्ति पर रोक लगानी चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि यह नियुक्तियां किसी व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
वहीं इस पूरे मामले में जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज के डीन विष्णु दत्त ने डॉक्टरों के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि डॉक्टरों में कोई मतभेद नहीं है। सहायक प्रधायपक की नियुक्ति डीन के अधिकार क्षेत्र में है। किसी भी कैंडिडेट की परमानेंट नियुक्ति नहीं की जा रही है।




