विदेश यात्रा का संस्मरण – कई बार तो खुद को झकझोरना पड़ता था भाई अब विदेशी धरती मे ही हो

विदेश यात्रा का संस्मरण आठ बस क्या था गाडी खडी थी बस हमने अपना सामान डिक्की में जमा लिया सौरभ और विपुला सामने और हम दोनों पीछे की सीट पर बैठे। विपुला को जीपीएस के कारण ही सामने बैठी जिससे हमे मार्ग का पता चलते रहे । आजकल जीपीएस तकनीकी उपकरण के कारण बहुत सुविधा हो गई है । बस अब सौरभ ड्राइविंग सीट पर सीट बेल्ट लगाकर दोनों बैठ गए। यहां उल्लेखनीय है कि हमारे यहां लेफ्ट हैंड ड्राइविंग है तो पश्चिमी देशों मे उसका उल्टा राइट हैंड ड्राइविंग सिस्टम है । जिसके चलते चलाने वाले को थोड़ा पहले असहज ही कर देता है । पर सौरभ ने इसके पहले भी यहां के माहौल मे गाडी चलाई थी तो ज्यादा फर्क नहीं पडा । बस गणपति बापा मोर या जय श्री राम के उदघोष के साथ हमने अपने सफर को चालू कर दिया। कुछ समय तो हमे एयरपोर्ट से बाहर निकलने मे ही निकल गए । कुछ देर बाद हम फ्रांस के पेरिस के खुली हवाओं मे दिन के वह उजाले मे थे । पर जिस तापमान में हम लोग रहते है यहाँ यह बिलकुल ही महसूस नहीं हुआ कि कोई तापमान मे विशेष फर्क है । ऐसे महसूस हो रहा था कि कहीं हम भारत मे ही तो नहीं है। कई बार तो खुद को झकझोरना पड़ता था भाई अब विदेशी धरती मे ही हो । पूरे परिवार के आनंदित चेहरे एक दूसरे के साथ अपनी अपनी खुशी को रोक नहीं पा रहे थे । क्यो न हो एक मध्यम वर्गीय परिवार वह भी पूरा परिवार यूरोप के धरा मे उतरा हुआ है। बस कार से बाहर देखने की उत्सुकता व नजारा देखने मे वयस्त थे । शायद एक गांव का बंदा शहर मे आए और छोटे से शहर का बंदा मुंबई व दिल्ली घूमने आए जो रोमांच वह महसूस करता है वही रोमांचक पल हम महसूस कर रहे थे । हर दृश्य को अपने आंखों में समाने की कोशिश मे लगे थे पर प्रकृति का नियम है कि जब नया आता है तो पुराने ओझल हो जाते है । बस यही हमारे साथ हो रहा था। जैसे ही पेरिस के सडकों में हमारी गाड़ी ने प्रवेश किया पहले बार तो ऐसा महसूस हुआ बस हमारे देश के शहरों में से एक शहर होगा । गगनचुम्बी इमारत और औधिगकता का मिश्रण जैसे यह शहर महसूस होने लगा। फिर वही अपने शहरों जैसे बड़े बड़े विज्ञापन के बोर्ड हमको अहसास करा रहे थे कि कुछ यहां के बारे मे भी समानता है । मैंने जब एल जी टीवी का बहुत बड़ा विज्ञापन देखा तो फर्क ही महसूस नहीं कर पा रहा था। जैसे जैसे आगे बढे तो कहीं सेमसंग ने भी फ्रिज टीवी अपनी उपस्थिति का अहसास कराया । तो फिर वरल पूरल सोनी के टीवी के विज्ञापन ने यह हमे बता दिया कि सब जगह इनके प्रचार प्रसार विज्ञापन मे कहीं भी कोई अंतर नहीं है। सब जगह एक ही तरीके से काम करते है । शायद यह हमारे लिए नया होगा पर काम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही होता है । क्रमशः बस इतना ही डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ




