संस्मरण चार कुछ दिनों मे ही वीसा भी आ गया अब जाना भी पक्का हो गया। आम तौर पर लोग किसी ट्रैवल एजेंसी के साथ जाते है तो अपनी ही तैयारी करनी रहतीं है कोई चिंता भी नहीं रहती है। मालूम है कि एक बार पैसा दे दो फिर उनकी जिम्मेदारी रहती है । पर हम लोगों ने स्वंय का सब प्लान था तो पूरी तैयारी का खाका हो पहले से तैयार करना था। सबसे बडी परेशानी तो मेरे को लेकर ही थी । मै प्याज लहसुन न खाने के कारण मै भी खुद चिंतित था कि यह दो हफ्ते कैसे निकलेंगे। इसलिए हम लोगों ने भरपूर नाश्ता यही से लेकर निकलने का तय किया था । हम लोगों ने भानजी भाई के यहां से बहुत नमकीन ले लिये थे । वहीं एक गुजराती परिवार से एक किलो खाखरा भी खरीद लिए थे । वहीं इंस्टेंट चाय और काॅफी के पैकेट रख लिए थे । फिर पूना से बाखरवडी और मिकशचर भी रख लिये । इस तरह की हमारी तैयारी थी कि हम लोग नाश्ते के मामले में दो हफ्ते निश्चिंत हो सके । बस क्या था कि हमारे यहां की नवरात्रि पूजा संपन्न हुई और दशहरे के दूसरे दिन हम लोग पूना के लिए निकले । अब एक खुशी उत्सुकता वहीं दूसरी ओर एक अज्ञात भय चाहे वो खाने को लेकर हो या भाषा को लेकर हो या वहां के माहौल को लेकर हो इस संशय के द्वंद मे मै तो कम से कम था । सौरभ ने वहां के जाने के बाद के एक एक दिन का मास्टर प्लान बना लिया था । जिससे हमारे यात्रा का एक भी दिन खराब न हो । जिससे बाद मे यह न लगे यह क्यो और कैसे छूट गया । जिससे बाद मे पछताना न पडे । सौरभ मेरे लडके का नाम है । उसी के अनुसार उसने वहां के रहने का इंतजाम किया। अगर हम लोग होटल मे रूकने का सोचते है तो वह काफी महंगा पडता है। जो अपने जैसे मध्यम वर्गीय लोगों के अनुरूप नहीं है । कभी भी घर बेचकर तीरथ नहीं किया जाता। इस क्रम मे हम लोगों ने एयर बी एन बी के माध्यम से हर जगह टू या थ्री बीएचके के जो फ्लैट लोग पूरी सुविधाओं के साथ रहते है उसे बुक कर लिया था। जहां किसी भी सुविधा के लिए कहीं भी नहीं जाना पडता । बस वह दिन भी करीब आ गया हमे निकलना है । बस इतना ही क्रमशः डा. चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ
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