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भूलकर भी ऐसी गणेश जी और लक्ष्मी माता की ऐसी मूर्तियां न खरीदें

दिवाली पर विघ्न विनाशक गणपति और धन की देवी लक्ष्मी का पूजन होता है. पूजा के लिए हर साल घर में गणेश-लक्ष्मी की नई मूर्ति लाई जाती है. इन मूर्तियों को खरीदने में भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।

आइए जानते हैं कि दिवाली के दिन गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. गणेश जी की मूर्ति ऐसी होनी चाहिए जो कि शास्त्रों के अनुसार सही हो. गणेश जी के स्वरूप के अनुसार बनी मूर्ति की पूजा करने से भगवान की कृपा मिलती है और पूजा का पूरा फल भी मिलता है. गणेश जी की मूर्ति में जनेउ, रंग, सूंड, वाहन, अस्त्र-शस्त्र, हाथों की संख्या और आकृति जैसी कुछ खास बातों को ध्यान में रखकर खरीदनी चाहिए।

बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा लेना शुभ माना जाता है. ऐसी मूर्ति की पूजा करने से धन लाभ होता है और कामकाज में आने वाली रुकावटें भी खत्म होती हैं.गणेश जी को वक्रतुंड कहा जाता है. मूर्ति में उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई होनी चाहिए।

ऐसी प्रतिमा की पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं. हाथ में मोदक लिए हुए गणेश जी की मूर्ति सुख और संपत्ति का प्रतीक मानी जाती है.जिस मूर्ति में गणेश जी का वाहन न हो ऐसी प्रतिमा की पूजा करने से दोष लगता है.

ध्यान रखें कि जब भी मां लक्ष्मी का पूजन विष्णु जी और गणेश जी के साथ करें तो हमेशा गणेश जी लक्ष्मी जी के दाहिने और विष्णु जी लक्ष्मी जी के बाएं होने चाहिए. सही तरीके से पूजन करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति होती है। पूजा स्थल में लक्ष्मी मां की दो मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए. लक्ष्मी मां की दो मूर्तियां आस-पास तो बिल्कुल नहीं रखनी चाहिए. ऐसा होने पर उस घर में कलह होती है. घर में खंडित मूर्ति या मां लक्ष्मी का फटा हुआ चित्र नहीं रखना चाहिए. वास्तु और ज्योतिष दोनों के हिसाब से ही ये अशुभ हैं।

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